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आखिर मान गए स्वर्ण सलारिया

Wed, 09 Apr 2014 10:47 PM IST
अमर उजाला, पठानकोट
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गुरदासपुर से आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की घोषणा करने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य स्वर्ण सलारिया आखिर बैठ गए।
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उनके बैठने पर भाजपा खासकर विनोद खन्ना ने राहत की सांस ली है। दिनभर सलारिया के पैतृक गांव चौहाना में चले सियासी ड्रामे में भाजपा के प्रदेश प्रधान कमल शर्मा, प्रदेश प्रभारी शांता कुमार ने सलारिया को मना लिया और पार्टी के साथ चलने की अपील की।

टिकट की लड़ाई में विनोद खन्ना ने स्वर्ण सलारिया को चित तो कर दिया लेकिन नाराजगी दूर करने में कामयाब नहीं हो सके। नाराजगी के कारण ही सलारिया हलके में खन्ना के स्वागत के लिए नहीं पहुंचे।
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खन्ना कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में लगे हुए हैं लेकिन उन्होंने सलारिया को मनाने का प्रयास तक नहीं किया। पिछले विधानसभा चुनाव में पठानकोट, दीनानगर, भोआ और सुजानपुर विस हलके में भाजपा के प्रचार अभियान की कमान थामने वाले सलारिया लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए प्रचार करने को नहीं उतरे बल्कि आजाद प्रत्याशी के तौर पर हलके से चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा की।

इसके बाद भाजपा नेताओं के हाथ पांव फूल गए थे। मंगलवार देर शाम स्वर्ण सलारिया लाव लश्कर के साथ पठानकोट पहुंचे और आजाद प्रत्याशी के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल करने की घोषणा की।

उन्हें मनाने के लिए देर रात पंजाब प्रधान कमल शर्मा और प्रदेश प्रभारी शांता कुमार भी पठानकोट आ गए थे। दोनों नेता सलारिया के घर उन्हें मनाने के लिए पहुंचे।

रात को खाली हाथ लौटे दोनों नेता बुधवार सुबह फिर गांव चौहाना में सलारिया के घर पहुंच गए। बंद कमरे में हुई बैठक में सलारिया और उनके बीच मान मनोव्वल का दौर चलता रहा लेकिन उन्हें दोबारा खाली हाथ लौटना पड़ा।
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दोपहर दो बजे सलारिया ने नामांकन पत्र न दाखिल करने की बात कही। भाजपा को इससे बड़ी राहत मिली है। सलारिया राजपूत बिरादरी से संबंध रखते हैं और गुरदासपुर में राजपूत बिरादरी का अच्छा खासा वोट बैंक है। भाजपा को चिंता सता रही है कि सलारिया को साथ जोड़ा नहीं गया तो राजपूत बिरादरी का वोट बैंक हाथ से निकल जाएगा।
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