सिविल अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान वीरवार को सेहत मंत्री सुरजीत सिंह ज्याणी के सामने गर्भवती से प्रसव के बाद उपहार स्वरूप रकम ऐंठने का मामला सामने आया। इस पर सेहत मंत्री भड़क उठे और उन्होंने मौके पर ही आरोपी आशा वर्कर और सफाई कर्मी को निलंबित करने का आदेश दिया।
उन्हें निरीक्षण के दौरान अस्पताल के वार्डों में भारी दुर्व्यवस्था नजर आई। यह देख वे बिफर उठे और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और डॉक्टरों की जमकर क्लास ली। उन्होंने कहा कि यदि एक माह के अंदर स्थिति नहीं सुधरी तो एसएमओ और सीएस पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।
सेहत अधिकारियों को उस समय सेहत मंत्री की फटकार सुननी पड़ी जब प्रसूति विभाग के निरीक्षण के दौरान एक गर्भवती महिला से प्रसव के बाद आशा वर्कर और सफाई कर्मी द्वारा रकम वसूलने का मामला सामने आया। गांव शहूर निवासी परमजीत कौर ने बताया कि जब अस्पताल में शिशु पैदा होने पर आशा वर्कर ने उससे 500 रुपये के साथ मिठाई का डिब्बा, बच्चे का भार तोलने वाले ने 300 रुपये, कपड़े बदलने वाली कर्मी और डिलिवरी रूम से बेड तक ले जाने वाले कर्मचारी ने भी उससे रुपये वसूले।
इसमें उसके लगभग दो हजार रुपये खर्च हुआ। सेहत मंत्री ने मौके पर उपस्थित सिविल सर्जन, एसएमओ को मामले में जवाब मांगा। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर सेहत मंत्री ने आरोपी आशा वर्कर और सफाई कर्मी को निलंबित करने का आदेश दिया।
दवा उपलब्ध कराने में दिक्कतों को दूर करने के निर्देश
सेहत मंत्री ने दौरे के उपरांत सेहत अधिकारियों को आदेश जारी किया कि जहां दवा वितरित की जाती है, वहां लोगों की सुविधा के लिए पक्के शैड की व्यवस्था हो। साथ ही वहां पंखे आदि लगाए जाएं। प्रत्येक वार्ड व डाक्टर के रूम में सफाई व्यवस्था का ध्यान रखा जाय।
यदि उनके एक माह में सफाई व्यवस्था सहित नहीं हुई तो कार्रवाई की जाएगी। कहा कि रोगियों को मुफ्त दवाईयां उपलब्ध करवाई जाएं। बाहर से दवा लिखने की अपेक्षा उन्हें मुफ्त दवा उपलब्ध कराई जाय। डाक्टर रोगी की पर्ची पर अपनी मोहर अवश्य लगाए। डाक्टरों को अपनी वर्दी पहने व नेम प्लेट लगाने के भी आदेश दिए।