जिले में इस बार लीची की बंपर पैदावार हुई है। माना जा रहा है कि यहां की लीची देहरादून की लीची के मुकाबले रसीलेपन और मिठास के मामले में कहीं कम नहीं है, लेकिन बेहद मेहनत के बाद मनमाफिक लीची उत्पादन में सफल जिले के किसानों को इस बात का मलाल है कि उनकी उपज को अपेक्षित बाजार नहीं मिल रहा है।
विपणन की उचित सुविधा के अभाव की वजह से किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। उपज को बाजार तक न पहुंचा पाने के कारण किसान हताश नजर आ रहे हैं। सुजानपुर व आसपास के क्षेत्र में लीची तोड़ने का कार्य शुरू हो गया है। जुलाई के दूसरे हफ्ते तक लीची शेष ची फसल भी तैयार हो जाएगी। क्षेत्र के किसान भूरी सिंह ,राज सिंह, विकास ठाकुर, अभिषेक सिंह व शक्ति सिंह ने बताया क्षेत्र में लीची की देहरादून और कलकता किस्म की पैदावार ज्यादा होती है। यहां लीची की सीडलेस व रोज मेनटेड किस्म भी होती है।
पिछले सालके मुकाबले इस बार बारिश समय पर न होने के कारण लीची की फसल लेट तैयार हुई है। इसका असर फसल के आकार पर भी पडा है, लेकिन फिर भी उपज संतोषजनक है। उन्होंने सरकार से क्षेत्र में लीची उत्पादन को देखते हुए किसानों को मंडीकरण की बेहतर सुविधा मुहैया कराने की मांग की है। ताकि क्षेत्र के किसान अपनी फसल को दूर की मंडियों तक भेजकर ज्यादा लाभ ले सकें । उचित बाजार न मिलने से किसानों को अपनी फसल लोकल मार्केट में बेचनी पड़ती है। ऐसे में उन्हें दाम से संतोष करना पड़ता है। क्षेत्र में रिटेल में लीची 80 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है।
बागवानी से जुड़े सौ से ज्यादा किसान
पठानकोट। क्षेत्र में 100 से ज्यादा किसान हार्टिकल्चर से जुड़े हुए हैं। उनके पास 10 से 20 एकड़ की जमीन पर लीची व आम के बगीचे हैं। अकेले पठानकोट तथा गुरदासपुर में पांच हजार एकड़ जमीन हार्टिकल्चर के अधीन आती है। जबकि हार्टिकल्चर से जंगलात का रकबा भी बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि विदेशी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए पठानकोट में पैकिंग, ट्रांसर्पोटेशन और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोल्ड स्टोर की व्यवस्था करने की जरूरत है, ताकि पठानकोट के साथ लगते हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, ऊना, चंबा और जम्मू-कश्मीर के कठुआ, सांबा व साथ लगते इलाकों से भी फलों व सब्जियों को भी यहां लाकर स्टोर किया जा सके।
लीची जोन के लिए जरूरतें
जरूरतों के मुताबिक जांच लैब, दिल्ली, चंडीगढ़ और मुंबई लीची ले जाने के लिए फ्रीज वैन, किसानों को हार्टिकल्चर सेंटर में अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के बारे में ट्रेनिंग, लीची ले जाने के लिए प्लास्टिक क्रेट की आसान उपलब्धता, फल और सब्जियों के संरक्षण के लिए उच्च क्षमता कोल्ड स्टोर, छोटे लीची उत्पादकों के लिए ट्रैक्टर आधारित छोटे स्प्रे पंप, अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैकिंग व्यवस्था, प्राथमिकता के आधार पर ट्यूबवेल कनेक्शन।