क्षेत्र के गांव सुनैया में पीलिया ने पांव पसार लिया है। दूषित पानी पीने के कारण लोग तेजी से इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। बीमारी के कारण गांव के करीब 61 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। इसमें अब तक दो लोगों की मौत भी हो चुकी है।
मरने वालों में एक बच्चा और एक युवक शामिल है। लगभग 2540 की आबादी वाले इस गांव में बीमारी फैलने की सूचना पर आखिरकार शुक्रवार को सरकारी अमला हरकत में आया। गांव में पहुंची टीम ने लोगों की मेडिकल जांच कर उपचार शुरू किया।
उधर, वाटर सप्लाई विभाग के कर्मियों ने पानी का सैंपल भरा। सेहत विभाग और वाटर सप्लाई विभाग की टीम के सदस्यों ने बताया कि बीमारी पर काबू पाने के लिए मुफ्त दवा दी जा रही है। बीमारी के कारण गांव में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों के अनुसार बीमारी के कारण एक बच्चे और एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। सेहत विभाग इन मौतों का कारण पीलिया को नहीं मान रहा। शुक्रवार को देखा गया कि गांव के चारों तरफ गंदगी ही गंदगी नजर आ रही है। गांव में सफाई का कोई भी प्रबंध नहीं है।
गांव के पानी की निकासी के लिए बना छप्पड़ पूरी तरह गंदे पानी से भरा हुआ है। लंबे समय से पंचायत या किसी दूसरे विभाग की तरफ से इस छप्पड़ की सफ ाई नहीं करवाई गई है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में उपलब्ध पेयजल पानी योग्य नहीं है।
ग्रामीण भयभीत
बटाला। साल 2012 में बटाला के गांधी कैंप में इसी तरह दूषित पानी की वजह से बीमारी और मौतों का सिलसिला शुरू हुआ था। तब सैकड़ों लोग डायरिया की चपेट में आ गए थे। इतना ही नहीं कई लोगों की मौत भी हुई थी। इसी को लेकर अब सुनैया गांव के लोग भी डर के साये में जी रहे हैं।
हैंडपंप का पानी न पीने की हिदायत
बटाला। एसडीएम लवजीत कौर कलसी ने बताया कि गांव सुनैया में 61 लोगों के पीलिया से पीड़ित होने की पुष्टि हुई है। हालांकि गांव में स्थिति कंट्रोल में है। गांव की सफाई के लिए नरेगा वर्करों को तैनात कर दिया गया है। डाक्टरों की टीमे गांव में तैनात हैं।
गांव के जिन दो लोगों की मौत हुई वह पूरी तरह अपना इलाज नही करवा पाये। न ही उनके परिजनों ने सिविल अस्पताल को इसके बारे में सूचित किया था। प्रशासन द्वारा गांव में शुद्ध पानी के दो टैंकर लगा दिए गए है। उन्होंने बताया कि गांव के लोगों से कहा गया है कि वे हैंड पंप का पानी न पीएं। 16 हफ्तों तक डाक्टरों की टीम स्थिति नियंत्रित करने में लगी रहेगी।