मानसून से पहले जिला प्रशासन बाढ़ से निपटने के सभी प्रबंध पूरे होने के दावे कर रहा है। जबकि भारत-पाक सीमा से सटे उज्ज दरिया के तटवर्ती गांवों के लोग बाढ़ के भय से सहमे हैं। उनका कहना है कि बाढ़ से निपटने के प्रबंध के मामले में प्रशासन का दावा पूरी तरह खोखला है।
सूरत-ए-हाल यह है कि दरिया से सटी जमीन पर पिछले वर्ष की तरह इस बार भी कटाव का खतरा बना है। इसकी वजह उसे रोकने के लिए किसी भी तरह की कोशिश का ना होना है। रोकथाम के लिए पिछले वर्ष जो स्पर बनाए गए थे, वे भी टूट चुके हैं।
ग्रमीणों के मुताबिक वैकल्पिक तौर पर प्रशासन की ओर से कटाव प्रभावित स्थानों पर बांस के करेट बांधने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन यह काम शुरू न हो सका। अब बरसात का मौसम सिर पर है। दूसरी तरफ दरिया के एक किनारे पर पूर्व में बनाए गए क्रेट भी टूट चुके हैं। ऐसे में यदि दरिया में पिछले साल की तरह ढाई लाख क्यूसेक तक पानी आया तो दर्जन भर गांवों में बाढ़ से तबाही तय है।
इन गांवों पर खतरा :
उज्ज दरिया से सटे सरोटा, दनवाल, दोस्तपुर, सिंबल कुलियां, समराला, मुट्ठी, जनियाल, मीर चक्क, भखड़ी, बम्याल, खोजकीचक्क एक दर्जन गांवों में भूकटाव रोकने के लिए कोई प्रबंध नहीं किया गया है। दरिया के किनारे बसे गुज्जरों के डेरे भी दरिया की जद से महज 10 मीटर की दूरी पर हैं। कटाव की स्थिति से जाहिर है कि सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।
अब भी याद है तबाही का मंजर :
दरिया की चपेट में आकर मुट्ठी के बलवान सिंह व नारायण सिंह की 3-3 एकड़, बलदेव सिंह, जोध सिंह, सुनील सिंह की पांच एकड़ और विशंबर सिंह की ढाई एकड़ जमीन का कटाव हो चुका है। दरिया का बहाव एक तिकोन की तरह हो रहा है। लहरें उनकी जमीन पर चोट कर रही हैं। उन्होंने बताया कि एक महीना पहले एसडीएम पठानकोट अमित महाजन ने क्षेत्र का दौरा किया था। वे किनारों पर बांस के स्पर बांधने का आश्वासन देकर लौट गए थे। मगर आश्वासन के अनुरूप काम कुछ नहीं हुआ। पिछले साल दरिया में दो लाख क्यूसेक पानी आया था। ऐसे में आसपास के गांवों भारी नुकसान हुआ। लोगों ने छतों पर चढ़कर अपनी जान बचाई थी। इस बीच लोगों को बचाने के लिए हेलीकाप्टर का प्रयोग करना पड़ा था।
तबाही के शिकार लोगों को मलाल
दरिया किनारे बसे असलदीन ने बताया कि पिछले साल दरिया में उनके साथ बेटे कालू और सदीम, वीरू, मखन समेत छह डेरे पानी में बह गए थे। तब से इधर-उधर उनके परिवार भटक रहे हैं। जबकि प्रशासन की ओर से उन्हें मुआवजा केवल दो हजार रुपये प्रति परिवार दिया गया। उन्होंने बताया कि दरिया के किनारे जमीन के साथ स्पर बांधा गया था, लेकिन किसी भी अधिकारी ने उसकी जांच तक नहीं की है और स्पर पानी में बह गए। इसलिए वर्तमान में तेज बहाव आने पर उनके डेरे को भी खतरा हो गया है। उधर, सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 31 जून तक बाढ़ से निपटने के सभी काम पूरे होने चाहिए थे, लेकिन फंड ही नहीं आया तो काम कहां से होगा।