बैंक से लिया कर्ज चुकता न कर पाने से आहत किसान द्वारा आत्महत्या करने का मामला गरमाया गया है। शनिवार को भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसानों ने मामले को लेकर पोस्ट आफिस चौक चक्काजाम कर धरना दिया। साथ ही मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की। आरोप लगाया कि प्रदेश में कर्ज चुकता न कर पाने से हताश किसान का आत्महत्या करना सरकार की नाकामी का सबूत है।
जिले में पिछले दिनों बैंक से लगभग 15 वर्ष पूर्व लिए 15 हजार रुपये कर्ज को वापस करने में असमर्थ किसान द्वारा जहरीला पदार्थ निगल कर आत्महत्या करने की घटना सामने आई थी। मामले को लेकर शनिवार को भारतीय किसान यूनियन एकता की ओर से स्थानीय पोस्ट आफिस चौक पर धरना दिया गया। किसानों ने मामले को लेकर प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी की गई। इस धरने की अगवाई यूनियन के पंजाब स्तर के नेता लखविन्द्र सिंह मंजियावाली तथा सुखदेव सिंह भागोकांवा कर रहे थे। धरने को सतबीर सिंह, सुखदेव सिंह थम्मन, बलजीत सिंह व सुरिन्द्र पाल सिंह ने भी संबोधन किया।
जाम के दौरान पोस्ट आफिस चौक पर यातायात को ठप रहा। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार छोटे व गरीब किसानों के कर्जे माफ करने के दावे कर रही है, तो दूसरी ओर गांव डालिया निवासी अनुसूचित जाति के किसान सुरेन्द्र सिंह द्वारा कर्ज चुकता न करने से परेशान होकर आत्महत्या करने सरीखी की घटनाएं सामने आ रही है।
मृतक सुरेन्द्र सिंह ने आत्महत्या करने से पहले एक नोट में लिखा था कि बैंक ने उसके द्वारा ली 15 हजार की राशि में ब्याज आदि जोड़ कर यह राशि लगभग 75 हजार रुपये बना दी है। यह राशि वह वापस करने में असमर्थ है। बैंक द्वारा उस पर दबाव बनाया जा रहा थ। वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये मुआबजा, परिवार के एक मैंबर को योग्यता अनुसार नौकरी तथा आरोपियों के विरुद्ध बनती कार्रवाई की जाए।