धान की सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू हो गई है लेकिन मंगलवार को पठानकोट के खरीद केंद्रों पर सरकारी खरीद एजेंसियां नहीं पहुंचीं। इसके साथ ही खरीद केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम रहा। प्रशासन ने धान के पकने में समय लगने का हवाला देकर मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया।
जिले के 15 खरीद केंद्रों पर धान की खरीद की जानी है। पठानकोट में मार्कफेड, कानवां में एफसीआई व पनग्रेन, नारंगपुर में मार्कफेड व पंजाब एग्रो, फिरोजपुर में मार्कफेड व वेयर हाउस, सरना में एफसीआई व पनग्रेन, भोआ में पनग्रेन, घो में मार्कफेड, नंगलभूर में मार्कफेड, मलिकपुर में वेयर हाउस, नरोट जैमल सिंह व बम्याल में पनसप, फरवाल में पनसप व वेयरहाउस और सिहोड़ा कलां में पनसप की ओर से धान खरीदा जाना है।
पिछले साल जिले में साढ़े 53 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद की गई थी। इस वित्तीय वर्ष में लगभग 56 हजार मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रशासन के दावों के विपरीत किसी भी मंडी में खरीद एजेंसी नहीं पहुंच सकीं। उधर, धान तोलने के लिए मापतोलक मंडी में होने चाहिए, लेकिन मापतोलक सरकारी दफ्तरों में पड़े रहे। इससे धान खरीद की प्रशासनिक तैयारियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पठानकोट मंडी में धान की गैर प्रमाणित किस्म लेकर आए भरोली गांव के किसान लखबीर सिंह, अजीत कुमार ने बताया कि उनका धान आढ़तियों की ओर से खरीदा जाना है लेकिन धान डालने के लिए मंडी के शेड में पर्याप्त जगह नहीं है। शेड के नीचे अभी भी आढ़तियों का सामान लगा है।
आढ़ती राजेश कुमार ने बताया कि पठानकोट मंडी में पहले मार्कफेड की ओर से धान खरीदा जाता था लेकिन अब वेयरहाउस की ओर से धान खरीदने की बात की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक खरीद एजेंसी फाइनल नहीं होने की वजह से खरीद का काम शुरू नहीं हो सका है।
दूसरी तरफ जिले की सरना और घो मंडी में भी सन्नाटा छाया रहा। ऐसे ही हालात दूसरी मंडियों में भी रहे। वहीं दूसरी ओर जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक मंगल दास ने दावा किया कि धान खरीद शुरू करने के आदेश के बाद से मंडी में सभी प्रबंध पूरे हैं। उन्होंने कहा कि इलाके में धान पकने में समय लग जाता है इसलिए सरकारी खरीद एजेंसियां भी देरी से पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि बुधवार से खरीद केंद्रों पर एजेंसियां पहुंच जाएंगी।