गांव शाहपुरकंडी में दो चचेरे भाइयों के शव बंद कमरे में मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। पुलिस का मानना है ठंड से बचने के लिए बंद कमरे में कोयला जलाने से निकली गैस से दोनों की मौत हुई है।
मामले की जांच की जा रही है। थाना शाहपुरकंडी पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल पठानकोट भेजे हैं। मृतकों की पहचान रमेश (18) पुत्र शत्रधारी व रमाशंकर (23) पुत्र रामदुलारे निवासी गांव हरपुर मसागर, तहसील हटा, जिला कुशीनगर उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है।
नूरपुर में रह रहे भाई उमेश ने बताया कि रमेश और रमाशंकर शाहपुरकंडी में एक दुकान पर फर्नीचर पालिश का काम करते थे। लोहड़ी वाले दिन उसकी भाई रमेश से फोन पर बात हुई थी।
इसके बाद काल करने पर न तो रमेश ने उसका फोन उठाया और न ही उससे मिलने के लिए नूरपुर आया। रविवार को उसे किसी ने फोन पर दोनों की मौत होने की सूचना दी। इस पर वह तत्काल गांव शाहपुरकंडी पहुंचा ।
दुकान मालिक बलशेर सिंह ने बताया कि लाोहड़ी वाले दिन रमेश और रमाशंकर शाम को छुट्टी करने के बाद घर चले गए थे। अगले दिन उनके किसी रिश्तेदार की मौत हो जाने पर वह दुकान नहीं गए। पिछले दो दिन से दोनों दुकान पर भी नहीं आए थे। इस पर उसने रमेश के भाई उमेश को फोन किया और दोनों के बारे में पूछा। दोनों वहां भी नहीं थे।
इसके बाद वह उनके मकान पर पहुंचे और मकान मालिक से उनके बारे में पूछा। मकान मालिक ने बताया कि 14 जनवरी को दोनों ने उनकी दुकान से चावल खरीदे थे। इसके बाद दोनों को नहीं देखा। इसके बाद दुकान मालिक और मकान मालिक अन्य लोगों के साथ उनके घर गए।
खिड़की से झांकने पर दोनों के शव बेड पर पड़े दिखे। कमरा व खिड़कियां अंदर से बंद थी। इस पर मामले की सूचना थाना शाहपुरकंडी व डीएसपी धारकलां को दी। मौके पर पहुंचे डीएसपी धारकलां रणजीत सिंह व थाना प्रभारी कुलदीप ने दरवाजा तोड़कर दोनों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए।
डीएसपी धारकलां रणजीत सिंह ने बताया कि दोनों के शवों के पास एक टीन का डिब्बा था, जिसमें लकड़ी का कोयला पड़ा था। अंदेशा है कि कोयले से बनी गैस से दोनों की मौत हुई है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने पर मौत की वजह का खुलासा हो सकेगा।
‘बंद कमरे में अलाव सेंकना जानलेवा’
एसएमओ डॉ. भूपिंद्र सिंह का कहना है कि बंद कमरे में अलाप सेकना जानलेवा है। कोयले से पैदा होने वाली कार्बन मोनो आक्साइड गैस आक्सीजन को पूरी तरह से खत्म कर देती है। कमरा, खिड़कियां बंद होने से इस गैस से जान जा सकती है। उन्हाेंने कहा कि कमरे में अलाव सेंकना हो तो खिड़की या दरवाजे का खुले रखने चाहिए।