अवैध क्रशरों पर लगाम करने के लिए इंडस्ट्री विभाग की ओर से नियम बनाए गए हैं, लेकिन उन नियमों को दरकिनार कर इलाके में क्रशर चल रहे हैं। लिहाजा प्रशासन ने चेकिंग के बाद उन क्रशरों को बंद कराने का फैसला कर लिया है। उन पर बाकायदा एफआईआर दर्ज कराने की प्रशासन की ओर से रिपोर्ट बनाई जा रही है।
फिलहाल खनन विभाग की टीम की चार दिन की जांच के बाद उन क्रशरों को चिह्नित किया गया है जो नियमों के विपरीत चल रहे हैं। इन क्रशरों को बंद कराने के लिए विभाग ने रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। फिलहाल रिपोर्ट को गुप्त रखा गया है। वहीं डीसी पठानकोट सिबन सी. ने भी अवैध रूप से चल रहे क्रशर बंद कराने की पुष्टि की है।
जानकारी के मुताबिक चार दिन तक खनन विभाग की जांच रिपोर्ट के बाद अवैध क्रशर बंद कराने पर मुहर लगा दी गई है। चार दिन में विभिन्न टीमों ने जिले के 200 से से ज्यादा क्रशरों पर चेकिंग की है। उनके स्टाक का पूरा रिकार्ड खंगाला गया है।
मालूम हो कि मीरथल में क्रशर मालिक हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से कच्चा माल लाने का दावा कर रहे हैं, जबकि हिमाचल सरकार की ओर से प्रदेश में रेत और बजरी की अंतरराज्यीय खरीद-फरोख्त पर पाबंदी लगा रखी है और सरकार के नियमों के मुताबिक क्रशर इंडस्ट्री लगाने से पहले उन्हें पांच किलोमीटर में कच्चे माल के दोहन का क्षेत्र बताना अनिवार्य किया गया है। लिहाजा 40 किलोमीटर दूर जम्मू-कश्मीर से कच्चा माल लाने की बात प्रशासन को हजम नहीं हो रही है।
रिपोर्ट तैयार की जा रही है : जीएम
जांच रिपोर्ट के बारे में खनन विभाग के जीएम बलविंद्र पाल ने कहा कि अभी रिपोर्ट तैयार की जा रही है और उसे डीसी पठानकोट को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर प्रत्येक क्रशर और खड्डों में जाकर टीम ने जांच की है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच पड़ताल में कुछ सुबूत मिले हैं।
कार्रवाई होगी : डीसी
इस बारे में डीसी सिबन सी. ने कहा कि अब तक खनन विभाग ने रिपोर्ट नहीं सौंपी है। उन्होंने कहा कि क्रशरों पर स्टाक का पूरा रिकार्ड रखना चाहिए। उन्होंने माना कि मीरथल में कुछ क्रशर अवैध रूप से चल रहे हैं और उनके पास लाइसेंस नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अवैध रूप से चल रहे क्रशर बंद कराए जाएंगे और उन पर एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
क्रशर इंडस्ट्री में 2006 के बाद आई बाढ़
वर्ष 2006 के बाद राज्य में खनन एक उद्योग के रूप में सामने आया है और माफियाओं के हत्थे खनन उद्योग चढ़ चुका है। पहले क्रशर इंडस्ट्री लगाने के लिए पर्यावरण विभाग की एनओसी लेकर किसी भी जगह पर क्रशर लगाए जा रहे थे। ऐसे किसी बाढ़ की तरह वर्ष 2006 के बाद से पठानकोट और गुरदासपुर में 4600 एकड़ खनन क्षेत्र में आती 90 खड्डों में लगभग 450 क्रशर खुल चुके हैं जिनकी तादाद पहले 150 के आसपास थी। पर्यावरण विभाग की एनओसी लेकर पहले कोई भी क्रशर इंडस्ट्री लग जाती थी और उसके लिए खनन विभाग से कोई एनओसी नहीं लेनी पड़ती थी लिहाजा अवैध खनन चल रहा था। अवैध खनन और खनन माफिया इंडस्ट्री पर हावी होने के बाद नई नीति बनाई गई और क्रशर इंडस्ट्री के लिए आवेदन विभाग के पास जमा होने थे और उसे अपनी इंडस्ट्री के लिए निर्धारित क्षेत्र के पांच किलोमीटर के भीतर कच्चे माल के दोहन का क्षेत्र भी बताना अनिवार्य किया गया। लेकिन, उन नियमों को धत्ता बताकर इलाके में क्रशर चल रहे हैं और माल 40 किलोमीटर दूर जम्मू-कश्मीर से माल उठाने की बात कर अवैध खनन किया जा रहा है।