चर्चित आकांक्षा आत्महत्या प्रकरण में सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश राजीव कालरा की अदालत ने पति समेत तीन लोगों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। जबकि मृतका की सास को तीन साल कैद की सजा का फैसला सुनाया।
17 अगस्त 2012 को आकांक्षा ने माधोपुर ब्यास लिंक नहर में कूदकर जान दे दी थी। उसके पिता चंडीगढ़ मुख्यालय में तैनात तहसीलदार सुभाष पदम ने आकांक्षा के ससुरालियों पर उनकी बेटी को खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक आकांक्षा ने 3 फरवरी 2003 को पूजन के साथ प्रेम विवाह किया था। मृतका जालंधर के एपीजे स्कूल में कंप्यूटर लेक्चरार के पद पर तैनात थी।
उनका आरोप था कि ससुराली आकांक्षा को दहेज में सिटी होंडा कार लाने की मांग को लेकर परेशान करते थे। इस प्रकार उसे खुदकुशी के लिए मजबूर किया गया। थाना डिवीजन नं.2 की पुलिस ने मृतका के पिता की शिकायत पर आकांक्षा के पति पूजन मल्होत्रा, ससुर सुधीर मल्होत्रा, सास रेणू और ननद कनिका के खिलाफ खुदकुशी के लिए मजबूर करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।
आकांक्षा को इंसाफ दिलाने के लिए उसके परिजनों ने जालंधर में एपीजे स्कूल के छात्रों को साथ लेकर कैंडल मार्च भी निकाला था। दो साल तक कोर्ट में चली उक्त मामले की सुनवाई के बाद अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश राजीव कालरा की अदालत ने पूजन मल्होत्रा, सुधीर मल्होत्रा और ननद कनिका को बरी करने के आदेश जारी किए, जबकि सास रेणू मल्होत्रा को तीन साल कैद की सजा का फैसला सुनाया है।