प्रदेश सरकार की ओर से आटा-दाल स्कीम के तहत गरीबों को दिए जा रहे सस्ते गेहूं और दाल की बांट डिपो होल्डरों की बजाय विभागीय कर्मचारियों से करवाने के फैसले से डिपो होल्डरों में रोष है।
शुक्रवार को बटाला के ग्रामीण और शहरी डिपो होल्डरों की बैठक में सरकार के इस फैसले की निंदा की गई। डिपो होल्डरों ने पांच फरवरी को इसके विरोध में डिप्टी कमिश्नर गुरदासपुर के सामने धरना देने का ऐलान किया है।
शुक्रवार को आयोजित बैठक में डिपो यूनियन बटाला के प्रधान अवतार सिंह ने कहा कि सरकार की तरफ से सस्ते अनाज की बांट सरकारी कर्मचारियों से कराने का फैसला गलत है।
डिपो होल्डर सात सालों से सस्ते अनाज की बांट ईमानदारी से कर रहे हैं। उन्होंने कभी सरकारी खजाने पर बोझ नहीं डाला। इसके बावजूद सरकार ने ये फैसला क्यों लिया।
अवतार सिंह ने कहा कि इसके विरोध में पांच फरवरी को डिप्टी कमिश्नर गुरदासपुर के दफ्तर के आगे धरना देने के साथ ही सभी डिपो बंद कर दिए जाएंगे।
इस दौरान जसबीर सिंह, हरमिन्दर सिंह, महंगा सिंह, गुरदेव सिंह, लखविन्दर कौर, अमनदीप सिंह, मनमोहन सिंह, लाल सिंह, जगदीश सिंह, जोगिन्द्र सिंह, जसबीर सिंह, प्रीतम सिंह, सुरजीत सिंह, कुलवंत सिंह, मनजीत सिंह समेत 50 डिपो होल्डर मौजूद थे।
प्रदेश सरकार की ओर से नीले कार्डों की संख्या दोगुनी करने के ऐलान के बाद डिपो होल्डरों ने गेहूं बांटने से इंकार कर दिया था और गेहूं बांटने के बदले सरकार से वेतन की मांग की थी।
इस पर सरकार ने गेहूं और दाल की बांट विभाग के सरकारी कर्मचारियों से कराने का फैसला लिया है। गेहूं की बांट के बदले वेतन की मांग करने वाले यह डिपो होल्डर अब बिना शर्त गेहूं-दाल बांटने को तैयार हैं। उनमें सरकार के फैसले के प्रति रोष है।