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फंड की कमी से बाढ़ प्रबंधन के इंतजाम अधूरे

Fri, 02 Aug 2013 05:35 AM IST
Pathankot
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पठानकोट। फंड की कमी के कारण रणजीत सागर बांध परियोजना शाहपुरकंडी पर आपातकालीन स्थितियों खासकर बाढ़ और बरसात में बाढ़ प्रबंधन के इंतजाम अधूरे हैं। वीरवार तड़के सुबह परियोजना के पावर हाउस में पानी घुसने के बाद पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन और सिंचाई विभाग ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपना शुरू कर दिया है। फंड नहीं मिलने के चलते परियोजना से सटे इलाकों की सुरक्षा भी भगवान भरोसे है। गौरतलब है कि अमर उजाला ने 13 जून को फंड की कमी के चलते सिंचाई विभाग की ओर से बाढ़ प्रबंधन के कार्य रोकने की खबर प्रकाशित कर कोई नुकसान होने की आशंका पहले ही जता दी थी। इसके बावजूद कोई सबक नहीं लिया गया। नतीजतन, थीन नाला टूटने के बाद पानी पावर हाउस में घुस आया। इससे कई कई फीट तक पावर हाउस में पानी और गाद जमा हो गई है। गाद व पानी की सफाई में 15 दिन का समय लगने की संभावना है, तब तक 50 करोड़ का विद्युत उत्पादन बंद होने की संभावना है। डिप्टी चीफ इंजीनियर पावर कारपोरेशन मुख्तियार सिंह थीन नाला में घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल करने के आरोप लगा रहे हैं। सवाल है कि फंड मुहैया होता तो बाढ़ प्रबंधन के सारे इंतजाम होते और किसी भी प्रकार का वित्तीय नुकसान न उठाना पड़ता है।
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जानकारी के मुताबिक डैम एडवाइजरी कमेटी की हिदायतों के अनुसार मानसून से पहले सीवरेज, वाटर सप्लाई, सड़कों के पाट वाल, टेलीफोन एक्सचेंज, कंट्रोल रुम के अलावा आइडल प्रोजेक्ट और पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के 87 किलोमीटर क्षेत्र में फैली झील में गेज साइट (सूचना केंद्र) स्थापित किए जाते हैं। ताकि बरसात में झील में शामिल होने वाले रावी दरिया, साथ लगती खड्डों व नालों से पानी का पता चल सके। लेकिन, छह सौ मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता वाली परियोजना से अब तक छह हजार करोड़ का बिजली उत्पादन करने के बावजूद रखरखाव के लिए फंड के नाम पर कुछ भी नहीं है। पंजाब सरकार ने बांध परियोजना के रखरखाव के लिए सलाना 15 करोड़ का बजट रखा है, लेकिन उसमें से 10 करोड़ ही जारी किए जाते हैं। इससे परियोजना की सुरक्षा में तैनात निजी सुरक्षा एजेंसी, वर्कचार्ज, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का वेतन, कोर्ट केसों की फीस, स्कूल बसों के अलावा अन्य खर्च मिलाकर 30 करोड़ की जरूरत है। दरअसल, परियोजना से होने वाली वार्षिक आमदनी लगभग 6 सौ करोड़ को बिजली विभाग अपने पास रख लेता है और उसमें से परियोजना के रखरखाव को एक पैसा तक नहीं दिया जाता है। जबकि पंजाब के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी हाई पावर स्टैंडिंग कमेटी ने परियोजना की कुल वार्षिक आय का तीन फीसदी बांध परियोजना के रखरखाव के लिए दिए जाने का फैसला किया गया है। वर्ष 2009-10 में बिजली विभाग ने 10 करोड़ की अदायगी परियोजना को की थी और उसके बाद एक रुपया तक नहीं दिया गया।
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