पंजाब में पंचायतों के विकास कार्यों के लिए जारी ग्रांटों में करोड़ों की धांधली का आरोप लगाती एक याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस फतेहदीप सिंह की एकल बेंच ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि क्या वह जांच के लिए तैयार है? याचिका में आरोप है कि निर्माण तकनीक से जुड़े ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के एक बड़े अधिकारी की देखरेख में विकास कार्यों के फंड क्लीयर हुए, जबकि बड़े स्तर पर धांधली हुई है।
ऐसी ही एक अन्य याचिका में कहा गया है कि विजिलेंस ब्यूरो पंचायती फंडों में धांधली की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं कर रही, क्योंकि गांवों में लगे पेवर ब्लॉक एक बड़े नेता की कंपनी से खरीदे गए। इस मामले में सीबीआई को भी शिकायत दी गई थी, लेकिन सीबीआई ने कहा था कि यदि पंजाब सरकार स्टाफ मुहैया कराए तो वह जांच के लिए तैयार है। इन दोनों मामलों को एक साथ जोड़ दिया गया है और ताजा मामले में सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। सुनवाई 16 मार्च को होगी। इन मामलों में बड़ी बात यह है कि याचिका दायर करने वाले पंचायत विभाग के ही अधिकारी एवं पंचायत यूनियन के प्रेसिडेंट हैं।
रायकोट के पार्षद सुरिंदर सिंह एवं मोहाली के गांव माणकपुर कल्लर निवासी बलविंदर सिंह समेत बलविंदर सिंह कुंभड़ा, हरिंदरपाल सिंह मावी और पंचायत विभाग के अधिकारियों ने इन मामलों में आरोप लगाया कि केंद्र व राज्य सरकार की ओर से करवाए जाने वाले पंचायत के विकास कार्यों में बड़े स्तर पर धांधली हुई है।
पंचायतों और पंचायत समितियों के फंडों से मोहाली सेक्टर-62 में बने विकास भवन की चौथी एवं पांचवीं मंजिल में सैकड़ों क्विंटल सरिया आईएसआई मार्का का न होकर घटिया लोहे का लगा। मोहाली के गांव बाकरपुर, सोहाना, कुंभड़ा व झ्यूरहेड़ी में भी विकास कार्यों के लिए जारी ग्रांटों के उपयोग में धांधली हुई। यहां गलियों में पेवर ब्लॉकों का आधार सीमेंट का न होकर रेत का है।
सरकारी रिकार्ड में राशि देने की खानापूर्ति
याचिकाओं में आरोप है कि खरड़ ब्लॉक में इंदिरा गांधी आवास योजना के तहत गरीबों को राशि जारी ही नहीं हुई, जबकि सरकारी रिकार्ड में राशि देने की खानापूर्ति की गई। गांवों के विकास कार्यों में घटिया सामग्री लगाने और आवास योजना के तहत ग्रांट नहीं मिलने के पक्ष में याचिकाकर्ताओं ने कई व्यक्तियों की ओर से शपथ पत्र दिए जाने की बात भी कही है। यह भी कहा है कि सीमावर्ती जिलों के विकास कार्यों के लिए आई ग्रांटों में भी धांधली हुई। पंचायत विभाग के अधिकारियों ने याचिकाओं में यह भी कहा है कि वर्ष 2010 के बाद से जारी ग्रांटों के बारे में वह स्वयं जानते हैं।
आरोप है कि विभाग के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर प्रकाश सिंह की देखरेख में ही यह ग्रांटें जारी हुईं। अधिकारी की शिकायतें भी की गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इन दलीलों के साथ कहा गया कि आखिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कहा है कि प्रदेश भर में आई ग्रांटों के उपयोग की जांच की जानी चाहिए। मांग की गई है कि सरकार स्पष्ट जांच नहीं कर सकेगी, लिहाजा सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए।