गुनाह बेटे ने किया और पंचायत ने सामाजिक बहिष्कार कर सजा उसके माता पिता को सुना दी। परिवार का हुक्का पानी बंद कर दिया। खाप पंचायत की तर्ज पर लिए गए इस फैसले से पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है। मामला चर्चा में आने के बाद अब अफसरशाही जागी है और इस तुगलकी फरमान को सुनाने वाली पंचायत के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि पंचायत के इस फैसले से वह खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। जीना दूभर हो गया है। उन्हें कोई जानकारी नहीं है कि उनका बेटा और महिला कहां हैं। उन्हें दोनों के संबंधों की भनक तक नहीं थी। यदि बेटे ने गुनाह किया है तो सजा भी उसे ही मिलनी चाहिए। पंचायत ने हमारा पक्ष तक नहीं सुना। हमें बुलाया भी नहीं। बहिष्कार के फैसले की जानकारी भी गुरुद्वारों के लाउड स्पीकर से की गई घोषणा से मिली।
लुधियाना की डीसी सुरभि मलिक ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डीडीपीओ और एसडीएम को तुरंत जांच के आदेश दे दिए हैं। पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की गई है। पीड़ित परिवार को इंसाफ दिया जाएगा।
डीडीपीओ अमरिंदर पाल सिंह चौहान ने बताया कि सरपंच ने गैर कानूनी काम किया है। इसके लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सरपंच रंजीत कौर को कहा गया है कि वह नया प्रस्ताव डालकर फैसला रद्द करें। सरपंच अपनी गलती मान रही हैं। एक चुनी हुई पंचायत ऐसा गैर कानूनी फैसला नहीं दे सकती। कानूनन जो भी कार्रवाई बनती है, वह की जाएगी। पूरे प्रकरण की रिपोर्ट डीसी को भेजी जाएगी। दूसरी ओर, रायकोट के एसडीएम गुरबीर सिंह कोहली ने बताया कि बीडीपीओ को गांव भेजकर कर कार्यवाही करने को कह दिया गया है। जिसने भी गलती की है, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
महिला सरपंच रंजीत कौर के पति केवल सिंह का कहना है कि गांव के किसान नेता उनसे सरपंच का लेटर हैड ले गए थे। उस पर ये प्रस्ताव डालकर ले आए। दबाव में आकर उनकी सरपंच पत्नी ने हस्ताक्षर कर दिए। उन्हें कानून की जानकारी नहीं थी, इसलिए उनसे गलती हो गई।
भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के प्रधान बूटा सिंह बुर्जगिल ने कहा कि अगर उनके किसी नेता ने इस तुगलकी फरमान पर हस्ताक्षर किए हैं तो यह गलत है। हमारी यूनियन की नीति यह नहीं है।
मामला सुर्खियों में आने के बाद शाम करीब सात बजे पुलिस और प्रशासन की टीम पीड़ित परिवार के घर पहुंची। बीडीपीओ परमिंदर सिंह और एक महिला पुलिस अधिकारी ने परिवार को सामाजिक सुरक्षा और इंसाफ का भरोसा दिलाया। साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि सोमवार को वरिष्ठ अधिकारी पंचायत के साथ बैठक कर उचित कार्रवाई करेंगे।
1. गांव की डेयरी में दूध नहीं बेच सकते।