रेल डिवीजन फिरोजपुर कॉमर्शियल विभाग में विज्ञापन के लिए विभागीय जमीन अलॉट करने को लेकर हुए 6.09 करोड़ के घोटाले में उत्तर रेलवे के जनरल मैनेजर (विजिलेंस) जीसी तिवारी ने एक क्लर्क, एक ओएस व एक डीसीएम समेत पांच लोगों की संलिप्तता बताते हुए इन्हें संवेदनशील सीटों से हटाने के आदेश दिए हैं।
बताया जा रहा है कि ये मामला सीबीआई को सौंप दिया गया है। लेकिन अब तक इस मामले के सभी दस्तावेजों को रेलवे से सीबीआई लेकर नहीं गई है। इस कारण जांच एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारों का कहना है कि जिस डीसीएम की इस मामले में संलिप्तता है, उन्हें करीब एक माह बाद तरक्की मिलने वाली है और इसी मामले में संलिप्त एक सीएमआई करीब तीन महीने बाद सेवानिवृत्त हो जाएंगे। ये दोनों अधिकारी अपने सभी लाभ ले जाएंगे। उसके बाद सीबीआई कार्रवाई शुरू करेगी।
सूत्रों के अनुसार, जनरल मैनेजर तिवारी ने एक पत्र भेज कर उत्तर रेलवे के चीफ कॉमर्शियल मैनेजर को इस मामले में संलिप्त सभी अधिकारियों व मुलाजिमों को संवेदनशील सीटों से हटाकर अन्य सीटों पर लगाने की बात कही है।
इस मामले में तीन विज्ञापन एजेंसियों के शामिल होने के कारण रेलवे विजिलेंस ने इस मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी। इस मामले को हैड क्वार्टर बड़ौदा हाउस के अधिकारियों ने सीबीआई को सौंप दिया है।
सूत्रों का कहना है कि सीबीआई का एक सीनियर अधिकारी इस मामले से जुड़ी सिर्फ एक फाइल ले गए हैं, जबकि बाकी की फाइलें दिल्ली में पड़ी हैं।
ज्ञात हो कि इस मामले में फंसे पांचों अधिकारी नियमों को ताक पर रख कर तीन विज्ञापन एजेंसियों को विभागीय जमीन पर विज्ञापन लगाने दे रहे थे, इससे रेलवे को लगभग 6.09 करोड़ का नुकसान हुआ है। लुधियाना, जगरांव, अमृतसर व जालंधर रेलवे स्टेशनों के परिसर में जगह दी गई थी।