जालंधर के लोहियां में तीन दशक पहले होंद में बने प्राइमरी हेल्थ सेंटर
(पीएचसी) लोहियां में पिछले एक साल से एक्सरे टेक्निशियन का पद खाली है।
डाक्टर एक्सरे करवाने को कहते हैं तो मरीजों को बाहर से ढाई सौ
रुपये खर्च करके एक्सरे कराना पड़ता है। अस्पताल में मंड क्षेत्र व दूर
गांव से लोग आते हैं। ऐसे में टीबी और हड्डियों के मरीजों को खासी परेशानी
झेलनी पड़ती है। यही नहीं सेंटर में डाक्टरों की भी भारी कमी है।
इस
पीएचसी में छह डाक्टरों के पद मंजूर हैं। इनमें से चार ही ड्यूटी पर हैं,
दो पद खाली हैं। चार डाक्टरों में भी कई बार एक ही डाक्टर ड्यूटी पर रहता
है। वीरवार को पीएचसी में एक डाक्टर ही हाजिर था। पीएचसी में दवाओं का भी
टोटा है, ऐसे में डाक्टर मरीजों को बाहर से दवाएं लिख कर देते हैं। सेंटर
में सफाई व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है। पीएचसी की दीवारों पर पौधे लगे हैं
और भीतर गंदगी की भरमार है।
गाइनी डाक्टर भी नहीं है पीएचसी में
लोहियां
पीएचसी में गाइनी का डाक्टर न होने से महिला मरीजों को खासी परेशानी झेलनी
पड़ती है। महिला माहिर डाक्टर की कमी के कारण मरीजों को प्राइवेट
अस्पतालों के पास जाना पड़ता है। अस्पताल के स्टाफ का कहना है कि इस
अस्पताल में आज तक कोई भी गाइनी स्पेशलिस्ट डाक्टर तैनात नहीं की गई है।
डाक्टरों की कमी से मरीजों की संख्या हुई कम
कभी
समय था जब पीएचसी में रोजाना करीब 200 की ओपीडी होती थी। उस समय मरीजों को
अंदर से दवाएं और अन्य सहूलियतें मिल रही थीं। हेल्थ सुविधाएं न मिलने से
अब अस्पताल की ओपीडी 40-50 तक सीमित हो गई है।
राजनीति की भेंट चढ़ा अपग्रेड करना
2006
में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने
पीएचसी को अपग्रेड करने के लिए शिलान्यास किया था। उद्घाटन के समय पूर्व
स्वास्थ्य मंत्री सुरिंदर सिंगला, हेल्थ सिस्टम कारपोरेशन के तत्कालीन
चेयरमैन कर्नल सीडी कंबोज ने अस्पताल में ट्रोमा सेंटर बनाने का भी वायदा
किया था। यह वायदा सरकार के बदलने के बाद आज तक वफा नहीं हो सका है।
डाक्टरों की कमी सरकार ने पूरी करनी है : एसएमओ
एसएमओ
डाक्टर त्रिलोचन सिंह का कहना है कि डाक्टरों की कमी को पूरा करना उनके
हाथ में नहीं है। एक्सरे टेक्निशियन की जो कमी है उसके लिए कई बार सरकार को
लिखा गया है। मरीजों की सहूलियत के लिए दवाओं का प्रबंध है। सरकार को
दवाओं के लिए कई बार लिखा जाता है लेकिन जरूरत के मुताबिक डाक्टरों को बाहर
से भी दवाएं लिखनी पड़ती हैं।