पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के पूर्व चेयरमैन रविंदर सिंह रवि सिद्धू के कार्यकाल में पैसे देकर पीसीएस अधिकारी बनने के दोष में एडिशनल सेशन जज राजिंदर अग्रवाल की अदालत ने 9 पीसीएस अधिकारियों को एक-एक साल की कैद और पांच-पांच हजार जुर्माने की सजा सुनाई है।
तीन अधिकारियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। जुर्माना अदा न करने पर दोषी पाए अधिकारियों को एक-एक माह की अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी पड़ेगी।
सजा पाने वाले 9 अधिकारियों में चार रिटायर हो गए हैं। बाकी सरकारी सेवा में हैं।
सरकारी वकील दीपइंद्र कुमार जैन ने बताया कि विजिलेंस ब्यूरो पटियाला ने पांच सितंबर 2002 को 12 पीसीएस अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
इन पर आरोप था कि वे पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के पूर्व चेयरमैन रविंदर सिंह रवि सिद्धू के कार्यकाल में लाखों रुपये रिश्वत देकर पीसीएस अधिकारी बने।
इन अफसरों को हुई सजा
सजा पाने वालों में डायरेक्टर लैंड रिकार्ड जालंधर इंद्र प्रीत सिंह काहलों, लुधियाना के एडिशनल जिला अटार्नी प्रितपाल सिंह ग्रेवाल, उनकी पत्नी जिला रेवन्यू अधिकारी लुधियाना बलराज कौर, ईटीओ जीरकपुर रजिंदर सिंह सिद्धू और एसडीएम फगवाड़ा परविंदर पाल सिंह शामिल हैं। चार रिटायर पीसीएस अधिकारी भूपिंदर जीत सिंह, हरबंस लाल बांसल, ओमप्रकाश वर्मा और जसबीर सिंह हैं।
ये अधिकारी रिहा हुए
तीन इन सर्विस पीसीएस अधिकारियों को सबूतों के अभाव में रिहा किया गया। उनमें एडीसी डेवलपमेंट फतेहगढ़ साहिब बलजीत सिंह, जरनैल सिंह और जसपाल सिंह शामिल हैं।
अमरिंदर ने दिए थे जांच के आदेश
वर्ष 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मामले में विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। उसके बाद यह मामला सुर्खियों में आया था।