‘महिलाएं नहीं पुरुषों से कम, बस इसके लिए उन्हें मौके देने चाहिए’
क्रासर - महिला दिवस पर समारोह में एडीसी और विभिन्न क्षेत्रों में देेेश का नाम रोशन करने वाली महिलाएं बोलीं
खास बात
अगर हम एक लड़की को शिक्षित करते हैं तो समझों कई पीढ़ियों को शिक्षित करते हैं
माई सिटी रिपोर्टर
मोहाली। एक अफ्रीकी कहावत है कि अगर हम एक लड़के को पढ़ाते हैं, तो हम एक व्यक्ति को शिक्षित करते हैं। वहीं, अगर हम एक लड़की को शिक्षित करते हैं, तो हम पूरे परिवार और कई पीढ़ियों के साथ पूरे समाज को शिक्षित करते हैं। लड़की को पढ़ने के लिए स्कूल भेजने से अगली पीढ़ी के भी शिक्षित होने की संभावना बन जाती है। यह बात मंगलवार को चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेजेस झंजेड़ी कैंपस में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित समारोह में एडीसी कोमल मित्तल ने कही। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में देश और समाज का नाम रोशन करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। इस मौके पर उन्होंने अपने विचार भी प्रकट किए।
इस समारोह में सदी की महान गायिका लता मंगेशकर और महिला अधिकारिता के नाम रहा। एडीसी कोमल मित्तल ने कहा कि लड़कियों की शिक्षा में निवेश करना देश में निवेश करने जैसा है। एक लड़की की शिक्षा उतनी ही जरूरी है जितनी कि एक लड़के की। आज भी हर तीन में से एक महिला घरेलू हिंसा का सामना करती है। जबकि हर सदी में महिला ने साबित किया है कि वह किसी भी तरह से पुरुष से कम नहीं है। इसके लिए उन्हें सिर्फ मौके दिए जाने चाहिए। ओलंपियन और अर्जुन पुरस्कार विजेता अंजुम मोदगिल ने कहा कि एक महिला होने का मतलब रचनात्मकता, पोषण और बदलने की शक्ति का प्रतीक है। लेकिन यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि दुनिया भर में महिलाओं को अपनी आजादी और अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा है। पुरुषों और महिलाओं के बीच की खाई को पाटना बहुत जरूरी है। अभिनेत्री आकांक्षा सरीन ने कहा कि एक मजबूत महिला होने का मतलब है कि वह ऐसी बन गई है जिसकी वह हकदार है। इस अधिकार को प्राप्त करने के लिए उसे मनुष्य के समान अवसर मिलने चाहिए।
राम प्रीत कौर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। यह वह दिन है जब हम महिलाओं की महान सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाते हैं। लेकिन यह दिन मां, बहन, पत्नी, बेटी सहित हर उस महिला को समर्पित है जो बिना किसी वेतन के साल भर हमारा पालन-पोषण करती है।