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सात साल बाद पलटा फैसला: हादसे में बरी चालक दोषी करार, कोर्ट ने प्रत्यक्षदर्शी की गवाही को माना भरोसेमंद

Thu, 23 Jul 2026 10:12 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली

सार

हरमीत कौर और उसकी सहेली मनदीप कौर एक्टिवा पर गांव खासपुर से चंडीगढ़ लौट रही थीं। जैसे ही वे अंबाला-बनूड रोड पर पहुंचीं, पीछे से तेज रफ्तार और लापरवाही से आ रही एक कार ने उनकी एक्टिवा को टक्कर मार दी। हादसे में मनदीप कौर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि हरमीत कौर घायल हो गई थी। 
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court new - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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करीब सात साल पुराने एक सड़क हादसे के मामले में मोहाली की अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने निचली अदालत का बरी करने का फैसला पलट दिया। कोर्ट ने आरोपी परविंदर सिंह उर्फ पिंदरा को लापरवाही से वाहन चलाकर एक युवती की मौत और दूसरी को घायल करने का दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के कठोर कारावास सहित विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई। 
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने यह फैसला पंजाब सरकार की ओर से दायर उस अपील पर सुनाया, जिसमें 1 नवंबर 2018 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मोहाली द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने अभियोजन की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया।  

मामला 15 जनवरी 2016 का है। शिकायत के अनुसार, हरमीत कौर और उसकी सहेली मनदीप कौर एक्टिवा पर गांव खासपुर से चंडीगढ़ लौट रही थीं। जैसे ही वे अंबाला-बनूड रोड पर पहुंचीं, पीछे से तेज रफ्तार और लापरवाही से आ रही एक कार ने उनकी एक्टिवा को टक्कर मार दी। हादसे में मनदीप कौर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि हरमीत कौर गंभीर रूप से घायल हो गई थी। 
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पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच के बाद परविंदर सिंह के खिलाफ चालान पेश किया था। 
सत्र अदालत ने अपने फैसले में कहा कि घायल प्रत्यक्षदर्शी हरमीत कौर की गवाही विश्वसनीय, सुसंगत और भरोसेमंद है। उसने दुर्घटना के तुरंत बाद वाहन का नंबर नोट किया था और अदालत में आरोपी की पहचान भी की। अदालत ने यह भी माना कि वाहन मालिक के बयान तथा अन्य साक्ष्यों से यह साबित हो गया कि हादसे के समय कार आरोपी ही चला रहा था। 

अदालत ने स्पष्ट किया कि टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (टिप) न होना अकेले अभियोजन के मामले को कमजोर नहीं बनाता, विशेषकर तब जब प्रत्यक्षदर्शी ने घटना के समय आरोपी को देखा हो और अदालत में उसकी पहचान की हो। इसलिए केवल टिप के आधार पर आरोपी को बरी करना उचित नहीं था।

सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी की पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देकर नरमी की मांग की, लेकिन अदालत ने कहा कि लापरवाह ड्राइविंग समाज के लिए गंभीर खतरा है और इससे एक युवती, जो पुलिस अधिकारी बनने का सपना देख रही थी, की जान चली गई। अदालत ने धारा 304-ए के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना, जबकि धारा 279 और 337 के तहत छह-छह माह के कठोर कारावास और 500-500 रुपये जुर्माना लगाया। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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