मोहाली। वर्ष 2018 के ट्रामाडोल कैप्सूल बरामदगी मामले में संदीप यादव को एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज की अदालत ने बरी कर दिया है। अदालत ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाए हैं। अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
अदालत ने कथित बरामदगी की प्रक्रिया और पुलिस गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाए। इन कमियों के कारण आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, जीरकपुर पुलिस ने 2018 में संदीप यादव को गिरफ्तार कर 220 ट्रामाडोल कैप्सूल बरामद करने का दावा किया था। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। अदालत ने तलाशी प्रक्रिया में भी खामियां पाईं। कोई गजटेड अधिकारी या मजिस्ट्रेट तलाशी के दौरान मौजूद नहीं था। आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने भी पेश नहीं किया गया।
बरामदगी पर विरोधाभासी बयान
मामले में कैप्सूल की बरामदगी की जगह को लेकर महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आया। जांच अधिकारी ने बताया कि कैप्सूल आरोपी की शर्ट के बाईं ओर से मिले थे। वहीं, रिकवरी के गवाह गुरप्रीत सिंह ने कहा कि कैप्सूल पैंट की जेब से बरामद हुए थे। अदालत ने इन अलग-अलग बयानों से बरामदगी की विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह जताया। अभियोजन पक्ष यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि कैप्सूल वास्तव में कहां से मिले थे।