नाइपर से निकाले गए फैकल्टी मेंबरों ने नाइपर के डायरेक्टर और रजिस्ट्रार और सीईओ खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि दोनों अधिकारियों पर सीबीआई ने केस दर्ज कर रखा है। इसके बावजूद वह पद पर बने हुए हैं। उन्होंने दोनों को पद से तुरंत हटाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने 15 दिन में दोनों को पदों से नहीं हटाया तो तिरंगा यात्रा निकालेंगे। यात्रा मोहाली से दिल्ली स्थित केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार के घर जाएगी। इसके बाद यात्रा में शामिल लोग मंत्री के घर के बाहर धरना देंगे। यह संघर्ष उस समय तक चलेगा, जब तक उनको पद से नहीं हटा दिया जाता है। इससे पहले फेज-4 स्थित मोहाली प्रेस क्लब में शनिवार को प्रेस कांफ्रेेंस में निष्कासित प्रोफेसरों ने जितेंद्र पाल छत्रसाल की अगुवाई में यूथ अंगेस्ट करप्शन फोरम का गठन कर नाइपर के खिलाफ अपनी जंग का एलान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों की वजह से नाइपर भ्रष्टाचार का स्थाई अड्डा बना हुआ है। दो अधिकारियों अपनी गलत पावर का प्रयोग क रहा हैं। वह प्रतिभाओं को नष्ट कर रहे है। इससे पहले प्रधानमंत्री व सीवीसी को पत्र भी लिख चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
अधिकारी ऐसे करते थे भ्रष्टाचार
डॉ. परीक्षित बंसल ने कहा कि वह नाइपर की एक्स फैकल्टी हैं। उन्होंने जब संस्थान में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ मुद्दा उठाया तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले संस्थान के वैज्ञानिकों को प्रोजेक्ट लिखने के लिए कहा जाता था। जब केंद्र से पैसा मंजूर होकर आ जाता था तो यह नहीं बताया जाता था कि कौन से प्रोजेक्ट के लिए पैसा आया है। उन्होंने बताया कि 11वें प्लान के तहत 156 करोड़ मंजूर हुए थे। इसमें 50 से 60 साठ करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि शेष पैसे भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गए। इसके अलावा बाद में कई प्रोजेक्ट फेल हो गए, लेकिन इसका कोई हिसाब-किताब नहीं दिया गया।
फरवरी 2016 में सीबीआई ने दर्ज किया था केस
सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने के मामले में सीबीआई ने फरवरी में नाइपर के कार्यकारी डायरेक्टर समेत नौ लोगों पर केस दर्ज किया था। इनमें रजिस्ट्रार व सीवीओ विंग कमांडर पीजेपी सिंह बड़ैच, कार्यवाहक रजिस्ट्रार, सेक्शन अफसर, डिप्टी रजिस्ट्रार और प्रोफेशर समेत पुणे की एक प्राइवेट कंपनी शामिल है। आरोपियों पर धारा-120-बी आरडब्ल्यू-420, 420, 409, 467, 471 आईपीसी व भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था। सीबीआई ने देशभर में 22 जगह छापेमारी की थी। सीबीआई के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। हालांकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
ऐसे लगाया था सरकारी खजाने को चूना
सीबीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, नाइपर के अधिकारियों ने पुणे की प्राइवेट कंपनी से मिलीभगत करके एक डाटा बेस एसीआई फाउंडर मार्केट से ऊंचे रेटों पर खरीदा था। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था। इतना ही नहीं इन अधिकारियों ने कुछ अज्ञात लोगों और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की थी। इस दौरान जहां उन्होंने खातों के साथ छेड़छाड़ की थी। साथ ही प्रोजेक्ट में जिन चीजों की मंजूरी नहीं थी, उनको भी खरीदा गया था।
ये कहते हैं अधिकारी
कुछ मामले कोर्ट में लंबित हैं तो कुछ मामलों की एजेंसियां जांच कर रही हैं। एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया जा रहा है। जिन लोगों ने प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाए हैं उनको जांच के बाद नाइपर से निकाला गया है। वर्ष 2011 में संस्थान में ज्वाइन किया था। ऐसे में मेरा इससे कुछ लेना-देना नहीं है। एजेंसियां जो डायरेक्शन देंगी उसे फॉलो किया जाएगा।
विंग कमांडर पीजेपी सिंह बड़ैच, रजिस्ट्रार व चीफ विजिलेंस अफसर नाइपर