मोहाली। वीरवार को सीपीआई कर्मचारी संगठन और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड एसोसिएशन के कर्मचारियों ने नई सरकारी पेंशन योजना के नोटिफिकेशन की कापियां फूंकीं। इस नई पेंशन योजना का विरोध करते हुए कर्मचारियों ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि पंजाब सरकार की ओर से मार्च 2019 में पेंशन बहाली के नाम पर विशेषज्ञों की ओर से एक रिव्यू कमेटी गठित की गई थी। यह रिव्यू कमेटी बने लंबा समय हो गया है, लेकिन आज तक पुरानी पेंशन योजना को लागू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने कहा कि जनवरी, 2004 के बाद, भर्ती किए गए कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बंद कर दी गई है। जिन लोगों को पुरानी पेंशन मिल रही है, उन कर्मचारियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस नई पेंशन प्रणाली के तहत सेवानिवृत्त हुए सभी कर्मचारियों को कम पेंशन ही मुहैया करवा जाएगी। अगर कर्मचारी की नौकरी के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। इससे परिवार आर्थिक तंगी में जीने को मजबूर हो जाएंगे।
इसके विपरीत, विधायक एवं सांसद जिन्हें कई तरह की पेंशन दी जाती है, उन्हें बिना किसी कटौती के पेंशन मिल रही है, जबकि वे केवल थोड़े समय के लिए ही चुने जाते हैं। जितनी बार विधायक एवं सांसद चुने जाते हैं, उन्हें समान पेंशन मिलती है।
इस मौके पर संगठन के नेता शिव कुमार ने कहा कि पंजाब सरकार की नौकरी करते समय कोई भी कर्मी अन्य कारोबार नहीं कर सकता। ऐसे में बुढ़ापे के लिए पैसे की बचत करने का कोई साधन नहीं है। वहीं, विधायक एवं सांसदों को मोटी पेंशनों के साथ करोड़ों के कारोबार करने का मौका दिया जाता है।
ऐसे में भविष्य की समस्याओं को लेकर सीपीआई कर्मचारी संगठन एवं पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड एसोसिएशन के कर्मचारियों को अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरने के सिवाय कोई चारा नहीं है।
2017 में पंजाब सरकार के घोषणापत्र में वादा किया गया था कि वे पंजाब के कर्मचारियों एनपीसी को बंद कर, पुरानी पेंशन योजना लागू करेंगे। जिसका फैसला पंजाब सरकार के कार्यकाल के तीन साल और आठ महीने बीतने के बाद भी नहीं लिया गया।
इस प्रदर्शन के दौरान जी.टी.यू. सुरजीत सिंह, रविंदर पप्पी, मनप्रीत सिंह, चरणजीत सिंह, सुखचैन सिंह सैनी, परमजीत सिंह बेनीपाल, लखविंदर सिंह घडुआं, गुरचरण सिंह टरमला, हरप्रीत सिंह, रॉबिन कुमार, नवदीप सिंह, अविनाश संधू, जसविंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, तेजिंदर सिंह, हरदीप सिंह और सुखपाल सिंह, बलराज सिंह, गुरिंदर सिंह और शिक्षा विभाग से सुनील गोयल, पंचायत विभाग से हरदीप सिंह मक्कड़ और जगदीश सिंह, हरजीत सिंह, सुखदेव सिंह और नविंदर नवी, जगतार सिंह आदि मौजूद थे।