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Mohali News: पुरानी करंसी आरबीआई में बदलने का दावा कर करते थे ठगी, 9.95 करोड़ की नकली और बंद करंसी समेत दो गिरफ्तार

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मोहाली। पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर डेराबस्सी से 9.95 करोड़ रुपये की जाली और बंद हो चुकी करंसी बरामद की है। गिरफ्तार आरोपी सचिन निवासी भारत नगर पिहोवा कुरुक्षेत्र हरियाणा और गुरदीप सिंह निवासी गुरदेव नगर कुरुक्षेत्र हरियाणा के निवासी हैं। उक्त दोनों आरोपी लोगों को पुरानी करंसी के बदने नई करंसी देने का दावा करते थे। गिरफ्तारी के वक्त दोनों स्कार्पियों में करंसी लेकर चल रहे थे। पकड़े जाने के बाद आरोपियों ने भागने का प्रयास किया लेकिन पुलिस टीम ने दोनों को काबू कर लिया। तलाशी के दौरान पुलिस को 11 लाख 5 हजार रुपये की असली करंसी भी बरामद हुई। इसके अलावा नकली और बंद हो चुकी 9.95 करोड़ की नकली करंसी बैग से बरामद हुई।
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डीएसपी डेराबस्सी बिक्रम बराड़ ने बताया कि पुलिस पार्टी को इस बारे में इनपुट मिली थी कि हरियाणा का एक गिरोह नकली नोट बदलने का कारोबार कर रहा है। थोड़ा सा लालच देकर बड़ी रकम हड़पने के बाद गायब हो जाता है। पुलिस ने इनपुट के आधार पर नाकाबंदी की और पुराना अंबाला-कालका हाईवे पर घग्गर पुल के पास पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के पास नाका लगाकर आरोपियों को पकड़ा।

यह थी करंसी
असल करंसी में पुराने 1000 के नोट में 7 लाख 42 हजार रुपये, पुराने नोट दो हजार के पकड़े गए 3 लाख 50 हजार और नए नोट 500 रुपये के 13 हजार कुल करंसी 11 लाख 5 हजार। इनमें जो नोट एक हजार व दो हजार के पकड़े गए हैं वह असली हैं। जबकि नकली नोटों में पुराने एक हजार के नोट 80 बंडल (लगभग 80 लाख रुपये), 500 रुपये के नोट नकली करीब 60 बंडल (लगभग 30 लाख रुपये), दो हजार के नोट 439 बंडल (लगभग 8 करोड़ 78 लाख रुपये) कुल नकली नोट लगभग 9 करोड़ 88 लाख रुपये की करंसी बरामद हुई है।
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एसएसपी ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि वे लोगों को ठगने के लिए नकली बंडलों के बाहर असली नोट रखते थे। अंदर नकली नोट भरते थे। उन्होंने पंजाब और पड़ोसी राज्यों में कई लोगों को ठगा है। धोखाधड़ी और नकली मुद्रा के पहले के मामलों में संलिप्तता के साथ उनका आपराधिक इतिहास है। उनके खिलाफ 2023 में मोहाली के एक निवासी से 7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के संबंध में पुलिस स्टेशन फेज-1 मोहाली में भी धोखाधड़ी का दर्ज है। इसी तरह से राजस्थान और अन्य राज्यों में कई अन्य मामले दर्ज किए गए हैं। अब आरोपियों के खिलाफ थाना डेराबस्सी में बीएनएस की धारा 318(4), 178, 179, 180 और 182 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक में पहचान का देते थे हवाला
डेराबस्सी। नकली करेंसी के साथ पकड़े गए दोनों आरोपियों ने मामले में कुछ अहम खुलासे किए हैं। डीएसपी बिक्रमजीत सिंह बराड़ ने बताया कि पुलिस जांच में खुलासा किया है कि आरोपियों ने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए जीरकपुर में करेंसी बदलने का एक दफ्तर बनाया हुआ था। यह दफ्तर इसलिए बनाया गया था ताकि लोगों को यह दिखाया जा सके कि वे भरोसेमंद व्यक्ति हैं। लोग उन पर आसानी से विश्वास कर लें।पहले वे लोगों का भरोसा जीतते थे, फिर बताते थे कि उनके कुछ जान-पहचान वाले व्यक्ति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) में काम करते हैं, जहां नोट छपते हैं। वे वहां से सस्ते दामों में असली नोट चोरी से निकालवा सकते हैं। इस तरह वे लोगों के साथ सौदा तय करते थे। पुलिस के अनुसार सौदा तय करने के बाद आरोपी लोगों को असली नोटों के साथ नकली नोट मिलाकर धोखाधड़ी करते थे। यह भी बताया गया कि जो दफ्तर उन्होंने बनाया हुआ था, वह केवल दिखावे के लिए था। वे वहां बैठते नहीं थे बल्कि अलग-अलग स्थानों पर मिलकर लोगों को ठगने की तैयारी करते थे। डीएसपी बराड़ ने बताया कि लोगों का विश्वास जीतने के लिए आरोपी पहले उन्हें थोड़े असली नोट सस्ते दामों में दे देते थे, ताकि आगे बड़ी रकम हासिल करने के बाद बड़ी धोखाधड़ी आसान हो सके।
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