फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरेआम सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों से हादसों का खतरा

विज्ञापन
विज्ञापन
जीरकपुर। शहर से गुजरते माल ढोने वाले वाहनों की ओवरलोडिंग एक बहुत बड़ी समस्या है और शहर में ऐसे ओवरलोड वाहन सरेआम बिना किसी डर के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन पर कोई नकेल नहीं कसी जाती, जबकि पुलिस की आंखों के सामने दौड़ते यह ओवरलोड लोगों के लिए उनकी जान का खतरा बने हुए हैं।
विज्ञापन

लेकिन यह ओवरलोड वाहन लोगों को तो नजर आ जाते हैं लेकिन पुलिस को क्यों नहीं दिखाई देते? यह एक बड़ा सवाल है। ओवरलोडिंग के कारण शहर में आए दिन कोई न कोई बड़ा हादसा हो जाता है। लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती और न ही इनसे कोई सबक सीखा जाता। इसमें समाज और पुलिस दोनों बराबर के जिम्मेदार हैं। क्योंकि आम लोग इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाते और पुलिस अधिकारी या आरटीओ डिपार्टमेंट इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता। यहीं कारण है कि यह ओवरलोड वाहन बिना किसी डर के सड़कों पर दौड़ते हैं।
बता दें कि एक तो जीरकपुर में ट्रैफिक जाम की बहुत बड़ी समस्या है और ऊपर से यह ओवरलोड वाहन जाम को ओर ज्यादा बढ़ा देते हैं। क्योंकि ओवरलोडिंग के कारण वाहनों को धीमी गति से चलाना पड़ता है। दूसरे वाहन को ओवरटेक करने में भी समस्या आती है। जिससे पहले ही लोग बेहद परेशान हैं। ओवरलोड वाहन अनियंत्रित होकर कोई बार पलट चुके हैं और उनमें सवार लोगों के अलावा आसपास से गुजरने वाले भी घायल हो चुके हैं। जबकि अब तक शहर में इस साल 23 हादसे हो चुके हैं, जिनमें लोग अपनी जान गवां चुके हैं, और 30 से ज्यादा लोग हादसों में घायल हो चुके हैं। वहीं, दूसरी ओर सर्दी शुरू होने से कोहरा भी होने लगा है और विजिबिल्टी कम हो जाती है। इस कारण ज्यादातर लोग ओवरलोड वाहनों को सड़क किनारे खड़ा कर देते हैं और हादसे हो जाते हैं। ऐसे कई हादसे इलाके में हो भी चुके हैं।
विज्ञापन

वहीं, शहर में इमारतों के निर्माण हो या कच्चा माल इधर उधर पहुंचाना हो हर वाहन ओवरलोड सामान लेकर चलता है। भट्ठों से ईंट, सब्जी के ट्रक, तुड़ी से भरे ट्रक, माइनिंग वाले ट्रक, सब्जी वाले हों या गन्ने से लदे ट्रक सबसे ज्यादा ओवरलोड होकर चलते हैं। वहीं ऑटो चालक भी ज्यादा सवारियां लादकर कर चलते हैं और ऑटो चालक के पास सीधा देखने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। पीछे से या साइडों से आने वाले वाहन उन्हें दिखाई नहीं देते। इस कारण यह ऑटो चालक एकदम ऑटो को कहीं भी मोड़ देते हैं और बिना देखे कहीं भी ब्रेक मार देते हैं। छोटे हाथी हो या फिर सामान ढोने वाली जीप सभी कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में ओवरलोड होकर चलते हैं। इसकी तरफ प्रशासन की ओर से ध्यान देने की जरूरत है।
क्या हैं लोडिंग के माणक
समान ढोने वाले बड़े वाहनों में लोडिंग के माणक के मुताबिक 10 टायरा वाहन में 28 टन, 12 टायरा में 35 टन, 14 टायरा में 42 टन, 18 टायरा में 45 टन, 22 टायरा में 55 टन, छोटा हाथी में तीन टन, ट्राली में 8 टन, ऑटो में पांच व्यक्तियों से ज्यादा नहीं बैठा सकते, इसके अलावा कई इलेक्ट्रॉनिक ऑटो में तो केवल दो या तीन सवारियां ही बैठा सकते हैं। लेकिन हर कोई अपनी क्षमता से ज्यादा माल लेकर चलता है।
समय-समय पर की जाती है चेकिंग और चालान
ट्रकों या ट्रालियों की ओवरलोडिंग की बात करें तो इनमें केवल परिवहन विभाग ही कार्रवाई कर सकता है। हम तो केवल उन्हें समझा सकते हैं या फिर परिवहन विभाग की मांग पर उनका सहयोग कर सकते हैं। लेकिन चालान और जुर्माना परिवहन विभाग ही कर सकता है। रही बात ऑटो चालकों की तो उनकी समय-समय पर चेकिंग की जाती है और उनके चालान भी किए जाते हैं। -सुखदीप सिंह, ट्रैफिक इंचार्ज जीरकपुर।
बड़े वाहन चालकों करते हैं जागरूक
ऐसी बात नहीं है कि हमारे विभाग की ओर से ओवलोडिंग वाहनों की प्रॉपर चेकिंग नहीं की जाती। ऐसे वाहनों की चेकिंग भी की जाती है और इनके खिलाफ कार्रवाई कर चालान भी किए जाते हैं। समय-समय पर ट्रैफिक पुलिस को साथ लेकर बड़े वाहन चालकों को जागरूक भी किया जाता है। -सुखविंदर सिंह, एआरटीओ, मोहाली।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें