जीरकपुर। बलटाना के सैनी विहार फेज-4 में बरसात के पानी से निजात दिलाने के लिए बनी दीवार को तोड़ने का मामला अब लोगों की समस्या के साथ-साथ राजनीतिक का अखाड़ा बन गई है।
दरअसल फेज-4 में बरसात का पानी भरने से रोकने के लिए यहां दीवार बनी हुई थी। जिससे लोगों के घरों की ओर बरसात का पानी न आए। लेकिन इस दीवार के पास एक अवैध कॉलोनी बसाने के लिए कांग्रेसी नेता दीपिंद्र ढिल्लों की सह पर कुछ कांग्रेसी नेताओं ने यह दीवार तुड़वा दी है। जिसका यहां के स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध किया।
जब यह दीवार तोड़ दी गई तो 24 घंटे बाद हलका विधायक एनके शर्मा अपनी टीम को लेकर लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए मौके पर पहुंच गए।
वहीं नगर काउंसिल ने इस बसाई जा रही कॉलोनी को कथित रूप में अवैध करार देते हुए कॉलोनी में विकास कार्य बंद करवा दिए हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक बीती गत सोमवार की शाम बलटाना के सैनी विहार फेज-4 स्थित कॉलोनी के पीछे उस समय हंगामा हो गया जब ज्वाइंट एक्शन कमेटी बलटाना के चेयरमैन प्रताप सिंह राणा ने कॉलोनी वासियों की मांग पर बरसाती पानी की निकासी करवाने के लिए कॉलोनी की दीवार तुड़वा दी। राणा की गलती यही थी, कि उन्होंने पूरी कॉलोनी को भरोसे में लेने की बजाय कुछ लोगों की सहमति से ही दीवार तुड़वा दी, जिसके चलते राणा को लोगों के विरोध का सामना करने के साथ-साथ कई तरह के इल्जाम भी सहन करने पड़े। कॉलोनी के लोगों ने इस मामले की शिकायत पुलिस को भी दे दी है।
वहीं हलका विधायक एनके शर्मा ने कहा कि किसी भी कीमत पर दीवार नहीं टूटने दी जाएगी जितनी तोड़ दी है उसे दोबारा बना दिया जाएगा और न ही यहां पर अवैध कॉलोनी बनाने देंगे।
वहीं मंगलवार को इस मामले पर दीपिंद्र ढिल्लों के नजदीकी हरजीत सिंह मिंटा भी सैनी विहार फेस-4 में पहुंचे। जिनके साथ जीरकपुर नगर काउंसिल के कार्यकारी अधिकारी संदीप तिवाड़ी भी मौजूद थे।
बता दें कि इस दीवार को तुड़वाने में हरजीत सिंह मिंटा के करीबी और स्थानीय कांग्रेस के ऑफिस इंचार्ज प्रताप सिंह राणा पर भी गंभीर आरोप लगे थे।
इस मौके पर पहुंचकर नगर काउंसिल के ईओ संदीप तिवाड़ी ने तोड़ी गई दीवार और यहां बरसात में पानी निकासी की समस्या को गंभीरता से समझते हुए अधिकारियों को तुरंत हल करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सैनी विहार फेस-4 के पीछे नियमों को ताक पर रख बनाई जा रही अवैध कॉलोनी को तब तक बनने नहीं दिया जाएगा जब तक कि इस बह रहे नाले यानि सुखना चो की जमीन पर निर्माण करने को लेकर लगाई गई धारा 55 के बारे में क्लियर नहीं हो जाता और बिल्डर कॅालोनी काटने के लिए पंजाब सरकार के निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं कर लेता। इसके बाद पूरे कागजात चेक करने के बाद ही यहां निर्माण किया जा सकता है।