मोहाली। फेज-6 में के डॉ. बीआर. आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के जच्चा-बच्चा बिल्डिंग में लिफ्ट बंद हुए को दो महीने से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन अब तक वैकल्पिक इंतजाम न होने से मरीजों को परेशानी हो रही है। बुधवार दोपहर 12 से 1 बजे तक अस्पताल परिसर में हालात का जायजा लिया गया। इस एक घंटे में 27 मरीजों और तीमारदारों को सीढ़ियों या रैंप से ऊपर जाते देखा गया, जिनमें 10 गर्भवतियां, 3 नवजात के साथ महिलाएं और 6 बुजुर्ग तीमारदार शामिल थे।
कई महिलाएं चढ़ाई के दौरान बैठ गईं, एक को आया चक्कर
पड़ताल के दौरान दो गर्भवती महिलाएं दूसरी मंजिल तक पहुंचते-पहुंचते दीवार का सहारा लेकर बैठ गईं। सेक्टर-70 से आईं एक महिला को चक्कर आ गया। उनके पति ने बताया कि डॉक्टर ने आराम की सलाह दी है, लेकिन यहां आना ही पहाड़ चढ़ने जैसा है।
चार व्हीलचेयर, उनमें से 2 टूटी हुई
जच्चा-बच्चा ब्लॉक में मौजूद चार व्हीलचेयर में से दो की फुटरेस्ट और एक का पहिया खराब मिला। एक तीमारदार ने कहा कि पहले व्हीलचेयर ढूंढो, फिर उसमें मरीज को बिठाओ और रैंप चढ़ाओ, वो भी टूटी गाड़ी में।
तीन बार नर्सिंग स्टाफ को मरीजों को स्ट्रेचर पर धक्का देते देखा
तीन मौकों पर नर्सिंग स्टाफ को स्ट्रेचर पर मरीजों को ऊपर की ओर ले जाते देखा गया, जिनमें एक प्रसव के तुरंत बाद की मरीज थी। बताया गया स्टाफ कम है, स्ट्रेचर उठाना बेहद थका देने वाला है, लेकिन मरीजों को छोड़ नहीं सकते
प्रबंधन का दावा– 7 दिन में चालू होगी लिफ्ट
अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नवदीप सैनी से जब दोबारा पूछा गया तो उन्होंने कहा ‘इंजीनियरिंग विभाग काम कर रहा है, और 7–8 दिन में लिफ्ट चालू हो जाएगी।’ हालांकि मरीज और तीमारदार इस वादे पर भरोसा नहीं कर पा रहे।
स्थानीय लोगों की मांग लिफ्ट चालू करें या स्टाफ बढ़ाएं
स्थानीय निवासी और मरीजों के परिवारों ने मांग की है कि जब तक लिफ्ट ठीक नहीं होती, तब तक रैंप पर स्थायी अटेंडेंट, अतिरिक्त व्हीलचेयर और इमरजेंसी स्ट्रेचर टीम तैनात की जाए।
अस्पताल का एक घंटा बहुत कुछ कह जाता है
सिर्फ एक मशीन नहीं, एक सिस्टम फेल है। सवाल है कि क्या मां और नवजात की सेहत को लेकर जिम्मेदार विभाग अब भी इंतजार कराएंगे? या फिर ये सिस्टम केवल वादों की लिफ्ट में ही अटका रहेगा?