मोहाली। वीआईपी सिटी मोहाली जो अपने आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और आईटी हब के रूप में विकास की गाथा लिख रहा है, वहीं एक ऐसा खतरा भी धीरे-धीरे पांव पसार रहा है जो इसके युवाओं की जान पर बन आई है। यह खतरा है एचआईवी/एड्स का। शहर में एचआईवी/एड्स के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसकी चपेट में सबसे ज्यादा 18 से 40 साल की उम्र का युवा वर्ग है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस बढ़ते संकट की गवाही दे रहे हैं। जिले में अभी 1600 एक्टिव एड्स मरीज दर्ज हैं और हर साल 300 से 400 नए मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इस बढ़ते संकट को लेकर गहरी चिंता में है। हालांकि एड्स लाइलाज है, लेकिन विभाग का कहना है कि समय पर इलाज मिलने पर मरीज लंबा और बेहतर जीवन जी सकते हैं।
युवा : सबसे बड़ा शिकार और सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों और डॉक्टरों का मानना है कि जीवनशैली में आए बदलाव, असुरक्षित यौन संबंधों की बढ़ती प्रवृत्ति और नशे की लत इसकी मुख्य वजहें हैं। इस उम्र में युवाओं में रिस्क लेने की प्रवृत्ति अधिक होती है, जो उन्हें इस घातक बीमारी की ओर धकेल रही है।
नशा है संक्रमण का सीधा रास्ता
चिंता का सबसे बड़ा कारण नशे की लत है। इंजेक्शन के जरिए ड्रग्स लेने वाले युवा और किशोर सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। एक ही सुई का कई लोगों द्वारा इस्तेमाल एचआईवी वायरस को फैलने का सबसे आसान और तेज रास्ता देता है। स्वास्थ्य विभाग ने नशा करने वाले युवाओं को हाई-रिस्क ग्रुप में चिन्हित किया है।
ट्रक ड्राइवर : एक प्रमुख लिंक
मोहाली राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा एक प्रमुख शहर है। यहां से गुजरने वाले ट्रक ड्राइवर भी इस बीमारी के बड़े शिकार बन रहे हैं। लंबी दूरी की यात्रा, घर से दूरी और असुरक्षित यौन संबंधों के चलते यह वर्ग भी संक्रमण फैलाने और फैलने का एक प्रमुख कारण बन गया है।
सबसे ज्यादा चपेट में टीनएजर्स
सबसे भयावह पहलू यह है कि अब यह बीमारी किशोरों (टीनएजर्स) को भी अपनी चपेट में ले रही है। कम उम्र में नशे की शुरुआत और यौन स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की गहरी कमी इसकी प्रमुख वजहें हैं। यह ट्रेंड आने वाले समय में समाज और परिवारों के लिए एक गंभीर संकट खड़ा कर सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की चिंता और रणनीति
डीआईओ डॉ. गिरीश डोगरा ने बताया कि हमारा मुख्य फोकस रोकथाम और जागरूकता पर है। हम नियमित रूप से लोगों के बीच जागरूकता शिविर लगाते हैं। सहायक सिविल सर्जन डॉ. पॉमी ने कहा युवाओं में जागरूकता की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। हम स्कूलों और कॉलेजों में विशेष सेशन आयोजित कर रहे हैं ताकि युवा सुरक्षित व्यवहार अपनाएं। एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है ताकि संक्रमित लोग बेहतर जीवन जी सकें। समय पर टेस्ट कराना और इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है।