जीरकपुर। बच्चों में कोल्ड डायरिया, उल्टी, दस्त, खांसी और सर्दी-जुकाम के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। ढकोली स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) में रोजाना करीब ढाई सौ से तीन सौ की ओपीडी होती है। इसमें पचास से साठ मरीज कोल्ड डायरिया के देखने को मिल रहे हैं। ठंड के मौसम में छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ रही है, जिससे वे जल्दी संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं।
बाल रोग चिकित्सक के अनुसार ठंड के मौसम में बच्चों को वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। कोल्ड डायरिया के मामलों में बच्चे बार-बार पतले दस्त, उल्टी और पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। खांसी, जुकाम और बुखार भी आम समस्या बन गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय पर इलाज न किया जाए तो बच्चों में डिहाइड्रेशन और कमजोरी की स्थिति गंभीर हो सकती है।
सीएचसी की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रिया मित्तल का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में बच्चों से संबंधित मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। खासकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में संक्रमण का खतरा अधिक देखा जा रहा है। बदलता मौसम बच्चों के लिए बीमारी लेकर आता है। अभिभावकों को बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
बच्चों को ठंड से बचाकर रखें, गर्म कपड़े पहनाएं और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। बच्चों को गर्म और ताजा भोजन देना चाहिए, ठंडा पानी और खुले में रखे खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए। अधिक मात्रा में मूंगफली, चिप्स या अधिक तला-भुना बच्चों को न खिलाएं। इसके अलावा दस्त या उल्टी की स्थिति में ओआरएस घोल का सेवन कराना जरूरी है। अगर लक्षण अधिक गंभीर हों तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। डॉक्टर के अनुसार सावधानी और समय पर इलाज से बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है। अभिभावक बच्चों प्रति लापरवाही न बरतें।