जीरकपुर। अब अगर आप सामुदायिक केंद्रों में कोई कार्यक्रम/समारोह आयोजित करना चाहते हैं तो आपको यहां देखरेख कर रही समाजसेवी संस्थाओं के सदस्यों के बजाय नगर परिषद से मंजूरी लेनी पड़ेगी। क्योंकि नगर परिषद ने इन सामुदायिक केंद्रों पर ताला जड़कर इनकी रेखरेख कर रही समाजसेवी संस्थाओं से जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। यहीं नहीं, इनकी बुकिंग के लिए आवेदन करने के साथ नगर परिषद में फीस जमा करवानी पड़ेगी। यह जानकारी देते हुए नगर परिषद के ईओ संदीप तिवारी ने कहा कि अभी तक सामुदायिक केंद्रों का जिम्मा समाजसेवी संस्थाओं के पास था लेकिन केंद्रों की देखरेख की ओर ठीक से ध्यान नहीं देने की शिकायतें मिल रही थीं। इससे लोगों को परेशानी होती थी। इस कारण समाजसेवी संस्थाओं से जिम्मेदारी वापस लेने का फैसला लिया गया है।
अब लोग सामुदायिक केंद्रों की बुकिंग के लिए नगर परिषद के कार्यालय में
गरीब परिवारों के लिए बनाए थे सामुदायिक केंद्र
जानकारी के मुताबिक, ट्राइसिटी की सीमाओं से सटे होने के कारण जीरकपुर की आबादी में पिछले कई साल से बढ़ोतरी हुई है। अब यहां की जनसंख्या करीब चार लाख हो चुकी है। वहीं, हजारों लोग ऊंची-ऊंची इमारतों के निर्माण कार्यों में मजदूर दिहाड़ी करके अपना परिवार पालते हैं। इसके अलावा छोटे कारोबारी और नौकरीपेश लोग शहर में रह रहे हैं। इन लोगों को अपने छोटे-मोटे कार्यक्रम/समारोह आदि करने के लिए भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। इसको देखते हुए जीरकपुर नगर परिषद ने इन परिवारों की मूलभूत जरूरतों को देखते हुए बलटाना, पभात, लोहगढ़, जीरकपुर, ढकोली, पीरमुछल्ला, किशनपुरा, सिंघपुरा, गांव छत्त, नगला, सनोली, दयालपुरा, नाभा, बिशनपुरा में सामुदायिक केंद्रों का निर्माण किया हुआ है।
देखरेख के लिए समाजसेवी संस्थाओं को सौंपा था काम
जानकारी के मुताबिक 2015 के दौरान जीरकपुर नगर परिषद ने फैसला लेकर शहर के विभिन्न क्षेत्रों के सामुदायिक केंद्रों की देखरेख का जिम्मा संबंधित क्षेत्रों की समाजसेवी संस्थाओं के नुमाइंदों को सौंपा था। ऐसा इसलिए किया गया था, जिससे सामुदायिक केंद्रों में होने वाली आमदनी से संस्थाओं के लोग केंद्रों की देखरेख करके लोगों को अच्छी सुविधाएं प्रदान कर सकें। लेकिन हुआ इसके उल्ट। संस्थाओं के नुमाइंदों ने सामुदायिक केंद्रों पर कब्जा तो जमा लिया, लेकिन जब कोई व्यक्ति केंद्र की बुकिंग करवाने के लिए आता था तो उससे मनमानी फीस के साथ कई तरह की शर्तें रखी जाती थी, जिनको पूरा करना आम आदमी के लिए मुश्किल होता था।
शहर के सभी सामुदायिक केंद्रों का जिम्मा समाजसेवी संस्थाओं से वापस लेकर अपना ताला लगा दिया गया है। अब नगर परिषद ही इनकी देखभाल करेगी। अब लोगों को सामुदायिक केंद्रों में कार्यक्रम/समारोह आयोजित करने के लिए परिषद के कार्यालय में आकर मंजूरी लेनी पड़ेगी।
- संदीप तिवारी, ईओ, जीरकपुर नगर परिषद।
फोटो कर्मचन्द
जीरकपुर : सामुदायिक केंद्र पर ताला जड़ते हुए नगर परिषद अधिकारी।