चंडीगढ़। यूटी प्रशासन, कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन (सीबीसी) और कर्मयोगी भारत के बीच आज एक समझौता (एमओयू) हुआ। इसका मकसद चंडीगढ़ के सरकारी कर्मचारियों के काम करने के तरीके, कौशल और जानकारी को और बेहतर बनाना है ताकि जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय में हुए इस एमओयू के दौरान चंडीगढ़ के मुख्य सचिव राजीव वर्मा, ओएसडी पर्सोनल स्वप्निल एम. नाईक, सचिव पर्सोनल अजय चगती मौजूद रहे। कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की ओर से सचिव व कर्मयोगी भारत की सीईओ वी. ललिता लक्ष्मी (आईएएस) और संयुक्त सचिव श्यामा प्रसाद रॉय शामिल हुए।
शुक्रवार को ही एक और समझौता चंडीगढ़ प्रशासन और सेक्टर-26 स्थित महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (एमजीएसआईपीए) के बीच भी हुआ। इसका उद्देश्य सरकारी कामकाज को और प्रभावी, आधुनिक और पीपुल फ्रेंडली बनाना है।
एमजीएसआईपीए की ओर से निदेशक अमित ढाका, कार्यकारी निदेशक गुलशन और जीएम (प्रशिक्षण) कर्नल दलबीर सिंह शामिल हुए। सीबीसी की सदस्य अल्का मित्तल ने बताया कि अब तक करीब 25,000 कर्मचारी आईजीओटी प्लेटफॉर्म पर जुड़ चुके हैं और उन्होंने 1 लाख से ज्यादा कोर्सों में नामांकन किया है। इनमें से 90,000 से ज्यादा कोर्स पूरे भी कर लिए गए हैं।
मास्टर ट्रेनर्स को दी जाएगी तीन दिन की ट्रेनिंग
मुख्य सचिव राजीव वर्मा ने कहा कि ये समझौते यह दिखाते हैं कि हम सरकारी कर्मचारियों की ट्रेनिंग और सेवा गुणवत्ता को लगातार बेहतर बनाने के लिए गंभीर हैं। इससे जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। सीबीसी की सचिव ललिता लक्ष्मी और एमजीएसआईपीए के गुलशन ने भी इस साझेदारी पर खुशी जताई और कहा कि इससे सरकारी कामकाज को नए स्तर पर पहुंचाया जाएगा।
सीबीसी के संयुक्त सचिव एसपी रॉय ने बताया कि सितंबर 2024 में राष्ट्रीय कर्मयोगी लार्ज स्केल जन सेवा कार्यक्रम शुरू किया गया था, जिसमें सरकारी कर्मचारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अब चंडीगढ़ प्रशासन में भी 15 अगस्त 2025 से पहले यह प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा, जिसके लिए मास्टर ट्रेनर्स को तीन दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी।