शिक्षकों और एएसआई पर मारपीट-धमकाने का आरोप
किशोर की मां और उनके दोस्तों ने आरोप लगाया कि उसका बेटा चंडीगढ़ के एक स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहा था। स्कूल के टीचरों और सेक्टर-17 क्राइम ब्रांच के एएसआई ने उसको काफी मारा और डराया। उसका कॅरिअर खत्म करने की धमकी भी दी। इससे वह बहुत डर गया।
किशोर की मां ने कहा कि एएसआई गुरदेव सिंह ने काॅल कर उसके बेटे को अकेले बुलाया। मां ने आरोप लगाया कि सेक्टर-17 के थाने में पुलिस, प्रिंसिपल सहित तीन टीचर भी मौजूद थे। उन्होंने बच्चे को धमकाया। किशोर के दोस्तों से पता चला कि पुलिस उसको अकेले अलग रूम में ले गई जहां उसके साथ मारपीट की। सभी ने उसको धमकाया कि उसका भविष्य खत्म कर देंगे। उसके खिलाफ पर्चा दर्ज किया जाएगा। दोस्तों ने बताया कि पुलिस ने उनके साथ भी मारपीट की। यह भी कहा कि दिल्ली से टीम आएगी। उनकी जिंदगी अब खराब हो जाएगी।
आरोपियों को फांसी दी जाए
किशोर की मां ने कहा कि वह चंडीगढ़ प्रशासन के पास शिकायत लेकर जाएगी क्योंकि जीरकपुर पुलिस का कहना है कि मामला चंडीगढ़ से जुड़ा है तो जांच भी वहीं होगी। उनका कहना है कि बेटे को मरने के लिए मजबूर करने वाले हरेक व्यक्ति को फांसी होनी चाहिए।
मां को पुलिस के आगे गिड़गिड़ाना पड़ेगा
किशोर की मां ने बताया कि उनके बेटे ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि मीम पेज की वजह से टीचर ने शिकायत की है। पुलिस अब उन पर लीगल करवाई करना चाहती है। उनसे एक स्टेटमेंट भी साइन करवा लिया है तो उसे डर है कि उसकी मां को पुलिस और टीचरों के आगे गिड़गिड़ाना पड़ेगा। अब मुझे कोई ऑप्शन नजर नहीं आ रहा है। इसलिए मैं अपनी लाइफ खत्म करने लगा हूं।
हमारे पास सुसाइड की शिकायत आई है। इसके आधार पर हमने बच्चे के परिवार और उसके दोस्तों के बयान दर्ज कर लिए हैं। आगामी कार्रवाई के लिए जांच की जा रही है। फिलहाल सुसाइड मामले पर ही काम कर रहे हैं।
- जसकंवल सिंह सेखों एसएचओ जीरकपुर
कैमरे चेक कर सकते हैं, बच्चों को कुछ नहीं कहा
साइबर सेल के अधिकारी ने बताया कि इस मामले में स्कूल की प्रिंसिपल और टीचर की शिकायत के बाद जांच की गई थी तो उसमें किसी देंवेद्र सिंह के नाम से मोबाइल का आईपी एड्रेस शो हुआ था। देवेंद्र को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। तब पता चला कि मोबाइल उनका बेटा इस्तेमाल करता है। शनिवार को देवेंद्र के बेटे के साथ तीन से चार दोस्त और आ गए। गुरदेव सिंह को नहीं पता था कि उन बच्चों में मृतक भी है। उन्हे सिर्फ समझाया गया था। 3:50 बजे मृतक की मां को कॉल की गई थी, जिसका रिकॉर्ड पता लग जाएगा। थाने के कैमरे से भी पता चल जाएगा कि पुलिस ने बच्चों को कुछ नहीं कहा।