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इंडस्ट्रियल एरिया में स्वच्छ भारत अभियान की निकली हवा

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मोहाली। गमाडा की ओर से इंडस्ट्रियल एरिया फेज-7, 8, 8ए और 8बी तो बसा दिए गए हैं, लेकिन इसके बाद से यहां उद्योगपतियों को दी जाने वाली मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। उक्त सभी फेज में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं और यहां आने-जाने वाले वाहन चालकों को भारी परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। जबकि यहां के उधोगपति सरकार को पूरा टैक्स भी अदा करते आ रहे हैं। इसके बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का बड़ा अभाव है। इस एरिया में बिजली और पानी की सप्लाई का भी बुरा हाल है। जिससे जहां उद्योगपति और रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को भी भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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उक्त सभी फेजों के उद्योगपतियों और रिहाइशी एरिया में रहने वाले लोगों ने इस मामले में कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से गुहार लगाई है कि उन्हेें सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं। लेकिन अधिकारी उनकी कतई सुध नहीं ले रहे हैं। उक्त एरिया में सफाई की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। इलाके में ‘स्वच्छ भारत’ अभियान पूरी तरह से फेल हो रहा है। हर तरफ गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। गंदगी के ढेरों पर लावारिस पशु मुंह मारते रहते हैं और ये पशु कई बार सड़कों से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बनते हैं। यहां का सीवरेज सिस्टम भी जवाब दे रहा है। सीवरेज जाम होने के कारण रोड गलियोें पर अकसर सीवरेज की गंदगी सड़कों पर बिखरी रहती है। इसके अलावा इलाके में सड़कों का बुरा हाल है।
इन सड़कों में पड़े हुए खड्ढे इलाके में आने वाले लोगों को काफी परेशान करते हैं। इस संबंधी समाज सेवी अतुल शर्मा का कहना है कि इलाके में जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वहीं, सुरक्षा के उचित प्रबंध नहीं है। जिससे इलाके के उद्योगपति खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। इलाके में हाई वोल्टेज बिजली की तारें नीचे की ओर झुकी हैं। ऐसे में उद्योगपति जब भी इलाके में बड़ी मशीन गाड़ी पर लेकर आते हैं, तो उन्हें परेशानी होती है और बिजली विभाग के अधिकारियों से विनती करके हाई वोल्टेज की तारों की सप्लाई बंद करवानी पड़ती है। इलाके में लगे बिजली के खंभे बहुत पुराने हैं। इन खंभों की वजह से हादसा हो सकता है। वहीं, इलाके में प्रदूषण की समस्या भी आम है।
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काम करने के लिए लेबर तक नहीं मिल रही
इस मौके पर उद्योगपतियों ने बताया कि एक तो बेरोजगारी के कारण लोगों को नौकरी नहीं मिल रही है। वहीं दूसरी तरफ उद्योगों को अब कारीगर तक नहीं मिल रहे हैं। क्योंकि अब ज्यादातर युवाओं का रुझान आईटी कंपनियों की तरफ ज्यादा हो गया है। उद्योगपतियों और लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इलाके की समस्याओं को पहल के आधार पर हल किया जाए।
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