मोहाली। वीरवार को जारी हुए अंतरिम बजट पर मोहाली शहर से लोगों की मिली जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने बजट को सामान्य बताया है तो कुछ ने इसे निराशाजनक बताया। हालांकि कुछ बजट से खुश भी नजर आए। टैक्स में किसी तरह का कोई बदलाव न किए जाने को लेकर भी लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया दिखी। विपक्ष ने इस बजट को उम्मीदों से विपरीत बताया है।
उद्योगपति
इस बजट से कोई खास उम्मीद नहीं थी। हालांकि बजट में देश के लिए प्रोग्रेसिव विजन जरूर दिखा। पंजाब की स्मॉल स्केल इंडस्ट्री को राहत दी जानी चाहिए थी।
-इकबाल सिंह, उद्योगपति, मोहाली
उद्यमियों पर कोई टैक्स नहीं बढ़ा है और कुछ कम भी नहीं किया। छोटी फर्में राहत की उम्मीद लगाए बैठी थीं। हो सकता है कि इस बार नहीं मिला। आगे फुल बजट में राहत मिल सकती है।
-मुकेश बंसल, उद्योगपति मोहाली
राजनीतिक
बजट किसी वर्ग के लिए सही नहीं है, कांग्रेस सरकार के समय बजट में हर वर्ग का ख्याल रखा जाता था। केंद्र सरकार के दूसरे कार्यकाल के अंतिम बजट से लोगों को काफी उम्मीदें थीं, जो चकनाचूर हो गईं हैं। -जसप्रीत सिंह गिल, प्रधान सिटी कांग्रेस मोहाली।
बजट पूरी तरह खोखला था, इसमें कुछ भी नहीं था। खासतौर से युवाओं, महिलाओं, किसानों के लिए कुछ भी नहीं है। सिर्फ अपनी पीठ थपथपाने की बात है। -परविंदर सिंह सोहाना, अकाली दल बादल के मुख्य सेवादार मोहाली।
यह भविष्य के सशक्त भारत की बुनियाद रखने वाला बजट है। बजट के बाद भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से तीसरे नंबर पर पहुंचने वाली है। बजट बढ़ते भारत की प्रगति की गति को और तेज करने वाला है। यह युवाओं के बेहतर भविष्य में काफी मददगार साबित होगा। किसानों व मध्यमवर्गीय लोगों में बजट से उम्मीद जगी है। -संजीव वशिष्ट, जिला प्रधान, भाजपा मोहाली
किसान
वित्त मंत्री ने किसानों और मजदूरों पूरी तरह निराश किया है। सभी जानते हैं कि चुनाव नजदीक हैं, इसलिए किसानों को उम्मीद थी कि इस बार सरकार उनसे किए वादे के मुताबिक आय दोगुनी करने की घोषणा करेगी। हालांकि, सरकार ने सभी फसलों की गैर-सरकारी खरीद का कानून बनाकर, केवल कागजों पर ही एमएसपी में बढ़ोतरी की है। दुनिया में जलवायु परिवर्तन के कारण अनाज की भारी कमी है। भविष्य में यह कमी पूरी होती नहीं दिख रही है। ऐसे में सरकार ने किसानों का हाथ थामना जरूरी नहीं समझा। - प्रगट सिंह, जिला जनरल सचिव, बीकेयू राजेवाल
बुजुर्ग
बजट में वरिष्ठ नागरिकों को कोई फायदा नहीं हुआ है। उन्हें कोई लोन नहीं मिलता, लेकिन इनकम टैक्स सबसे पहले भरते हैं। बचत तो उनका होता है, जिनके पास पैसे ज्यादा आते हैं। 25 वर्षों से ओल्ड एज पेंशन स्कीम में कोई बदलाव नहीं किया गया। बाकी सभी कार्यों के लिए रिसोर्स हैं, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के लिए नहीं है। सीनियर सीटिजन डिपॉजिट फंड में भी जो ब्याज मिलता था, उसे भी कम कर दिया है। - ब्रिगेडियर (रि.) जेएस जगदेव, अध्यक्ष, सीनियर सिटीजन एसोसिएशन, मोहाली।
हमें इस बार के बजट से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन बजट ने निराशा किया है। वरिष्ठ नागरिकों को कोई लाभ नहीं दिया। इनकम टैक्स में कोई छूट नहीं मिली है। यहां तक कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेलवे रियायत जो कि कोविड काल में रोक दी गई थी, उसे भी बहाल नहीं किया गया है। - जरनैल सिंह, उपाध्यक्ष, सीनियर सिटीजन एसोसिएशन, मोहाली।
विद्यार्थी
सभी फ्री योजनाएं बंद की जानी चाहिए और इसकी जगह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी तो फ्री की वस्तुओं की जरूरत ही नहीं होगी। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। -मेघना सिद्धू, छात्रा, निवासी फेज-6
गृहिणी
केंद्रीय बजट ने किचन का बजट पूरी तरह से बिगाड़ के रख दिया है। तेल, शक्कर, दाल के बाद अब सब्जियों के दाम भी बढ़ रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, बिजली बिल आदि खर्च बढ़ जाएंगे। बजट ऐसा होना चाहिए कि घर के राशन का सामान सस्ता हो। -अनीता झा, स्थानीय निवासी, भांखड़पुर
नौकरीपेशा
बजट में कुछ खास बदलाव देखने को नहीं मिला है। टैक्स स्लैब में भी किसी तरह का कोई बदलाव नहीं दिखा। -दीपक झा, स्थानीय निवासी भांखड़पुर।