मोहाली। साइबर क्राइम ने अलग-अलग राज्यों में छापा मारकर डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने के मामले में दो गिरोह के छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह करीब 92 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। दोनों गिरोह में दस लोग शामिल हैं। अभी चार लोगों की गिरफ्तारी होनी है। गिरफ्तार लोगों में तनावर याज्ञनिक, वित्तराग एम. साह, धवल और निमेश की पहचान हो गई है। पुलिस ने वीरवार को चार आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने सभी को तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया है।
एसएसपी हरमनदीप हंस ने कहा कि लोगों को झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने का डर दिखाकर आरोपी लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे कड़ी रकम ठग लेते हैं। जांच में सामने आया कि यह दो गिरोह देशभर के कई राज्यों में दर्जनों लोगों के साथ लगभग 92 करोड़ की ठगी का चुके हैं। एसएसपी हंस ने बताया कि छह आरोपियों को तामिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात से गिरफ्तार किया गया है। दो आरोपी पहले ही जेल में हैं, उनको प्रोडक्शन वारंट पर लाया जाना है। इसमें दो आरोपी अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उनकी तलाश में छापा मारा जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई थाना साइबर क्राइम फेज-7 में डिजिटल अरेस्ट संबंधी दो अलग-अलग मामलों में की गई है। इन आरोपियों की गिरफ्तारी मोहाली में पीड़ितों के साथ हुई करीब तीन करोड़ की ठगी में हुई है। साइबर पुलिस ने आरोपियों के 310 बैंक खाते फ्रीज करवाए हैं। इसके अलावा उक्त आरोपियों के खिलाफ बंगलुरु में 12.50 करोड़ रुपये डिजिटल गिरफ्तारी करने के बारे में मामला दर्ज किया है।
चार माह में साइबर पुलिस की कार्रवाई
साइबर पुलिस ने छह काल सेंटर का पर्दाफाश कर 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें सात विदेशी नागरिक शामिल हैं। आरोपियों से 30 लैपटाप, 159 मोबाइल फोन, 169 सिम कार्ड, 127 बैंक डेबिट कार्ड और 158 बैंक खाते बरामद हुए हैं। एक हनी ट्रैप में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साइबर पुलिस ने रेलवे विभाग में नौकरी का झांसा देकर लगभग 25 पीड़ितों के साथ ठगी करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। साइबर पुलिस ने अलग-अलग मामलों में 4 करोड़ 12 लाख 97 हजार 342 रुपये पीड़ितों को वापिस करवाए हैं। वहीं एसएसपी हंस ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट का शिकार हो चुके व्यक्तियों की बैंक के माध्यम से पहचान करके पैसा ट्रांसफर करने से पहले ही हस्तक्षेप करके लगभग दो करोड़ की ठगी रोकी गई है।