जीरकपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से गठित एक समिति की जांच में सामने आया है कि जीरकपुर से बिना ट्रीटमेंट (असंशोधित) के छोड़ा जा रहा सीवरेज का गंदा पानी घग्गर नदी को दूषित कर रहा है, इससे लगातार चिंता बढ़ रही है। यह प्रदूषण जीरकपुर से बगैर प्रोसेस किए छोड़े जा रहे सीवरेज के पानी से उत्पन्न हो रहा है।
समिति ने पाया है कि जीरकपुर से सीवरेज प्राप्त करने वाला स्थानीय सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) 17.3 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) को संभालने के लिए तैयार किया गया था, गैर-कार्यशील पाया गया। जिससे आंशिक रूप से उपचारित सीवरेज 3.5 किलोमीटर के भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घग्गर में बह रहा था। समिति ने सुखना चो के किनारों, विशेष रूप से बलटाना क्षेत्र के पास, प्रदूषण संकट को बढ़ावा देने वाले व्यापक ठोस और निर्माण कचरे का दस्तावेजीकरण किया। चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर विनय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति ने सुखना चो के मूल से घग्गर नदी में मिलने तक प्रदूषण के स्रोतों की पहचान के लिए 26 सितंबर, 2024 को भौतिक सर्वेक्षण किया था।
डेराबस्सी के एसडीएम अमित गुप्ता, मोहाली के डीसी के प्रतिनिधि धर्मिंदर कुमार गुप्ता, क्षेत्रीय कार्यालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निदेशक जगदीश प्रसाद मीना, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक और जीरकपुर नगर परिषद के ईओ अशोक पथरिया भी शामिल थे।समिति का गठन 11 जुलाई, 2024 के एनजीटी आदेश के अनुपालन के लिए किया गया था। इस समिति ने सुखना चो के किनारे स्थित गाजीपुर गांव का भी दौरा किया और पशुओं के गोबर के डंप के कारण आने वाली दुर्गंध का भी उल्लेख किया। पंचकूला के मनसा देवी क्षेत्र से भी बिना ट्रीटमेंट के (असंशोधित) सीवरेज का पानी सुखना चो में गिरने से मामला और जटिल हो गया है।
समिति की सिफारिशों में ठोस कचरा डंपिंग साइटों की पहचान के लिए जीरकपुर नगर परिषद द्वारा एक विस्तृत सर्वेक्षण और अन्य डंपिंग से रोकने के लिए लोहे के जाल बैरियरों की स्थापना शामिल है। जीरकपुर नगर परिषद को मौजूदा 17.3 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी के नियमित संचालन और रखरखाव को सुनिश्चित करना होगा। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है कि जीरकपुर नगर परिषद और एसटीपी ऑपरेटर द्वारा एसटीपी की कार्यक्षमता पर ध्यान केंद्रित करते हुए अन्य प्रदूषण के निकास को रोकने के लिए सुधारात्मक उपाय तुरंत लागू किए जाते हैं।
इस समिति की रिपोर्ट के अनुसार पंचकूला की नगर निगम को एसटीपी के संचालन की भी निगरानी करनी चाहिए जो घग्गर नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए नालों के माध्यम से सुखना चो में गंदे पानी को छोड़ते हैं। समिति ने एनजीटी को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन महीने का समय मांगा है।