मोहाली। कैश वैन का किराया नहीं देने पर ट्राइसिटी के रेलवे स्टेशनों के टिकट बुकिंग काउंटरों से लाखों की नकदी बिना सुरक्षा के ही बाइक पर ही बैंक की शाखा तक पहुंचाई जा रही है। इससे रास्ते में सरकारी खजाने की लूटपाट का डर बन हुआ है। इस संबंधी 17 नवंबर को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद ठेकेदार के खाते में विभाग की ओर से 12,352 रुपये डाल दिए गए थे। दो दिन काम करने के बाद जब ठेकेदार ने बिल के बकाया पैसे मांगे तो उसे फिर से टाल दिया गया, इसके बाद फिर से ठेकेदार ने कैश वैन भेजनी बंद कर दी। अब आलम यह है कि मोहाली समेत ट्राइसिटी के सभी रेलवे स्टेशनों के टिकट बुकिंग काउंटरों से लाखों की नकदी बाइक पर दो कर्मचारियों के साथ बैंक में भेजी जा रही है। ऐसे में बीच रास्ते में लूटपाट या अन्य घटना होने का डर बना रहता है, क्योंकि खुद रेलवे प्रशासन ही लापरवाही करके बिल्ली के सामने दूध खुला रखकर बैठा हुआ है।
इतना ही नहीं 19-20 नवंबर को जब ठेकेदार ने गाड़ी भेजी तो सिर्फ चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का ही कैश बैंक तक पहुंचाया गया था, बाकी मोहाली और चंडी मंदिर का कैश निजी वाहनों से ही भेजा गया। 21 नवंबर से चंडीगढ़ का कैश भी निजी वाहन से ही जा रहा है। अभी विभाग को ठेकेदार के 27,684 रुपये चुकाने हैं, लेकिन अंबाला डिविजन में बैठे अधिकारी उसके बिल पास करने में आनाकानी कर रहे हैं। संवाद
आरपीएफ ने निजी वाहन में जाने से किया इनकार
बता दें कि जब भी कैश वैन बैंक के लिए जाती है, तो ड्राइवर के साथ बंदूकों से लैस दो आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) के जवान और एक रेलवे का कर्मचारी भी साथ जाते हैं। लेकिन सूत्रों के मुताबिक जब से ठेकेदार ने चालक भेजने से मना किया, तब से आरपीएफ जवान भी नहीं जा रहे हैं। उन्होंने नकदी के साथ निजी वाहनों में जाने से भी इनकार कर दिया है, लेकिन प्रशासन को शायद इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।