मोहाली। जिले में पराली जलाने वाले किसानों की अब खैर नहीं। पराली जलाते समय पकड़ने जाने वाले किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में प्रशासन रेड एंट्री प्रशासन करेगा। इसके बाद किसानों को जहां सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिल पाएगी। वहीं, जमीन पर लोन आदि लेने में भी उन्हें दिक्कत आएगी। यह बात सहकारी सभा सनेटा में पहुंचे प्रमुख सचिव अनिरुद्ध तिवारी ने कही। उन्होंने यह भी कहा कि मोहाली को किसानों के लिए मॉडल बनाया जाएगा।
जिले में अभी तक धान के सीजन के दौरान पराली जलाने के 56 मामले सामने आए हैं। डीसी गिरीश दियालन ने इन सभी मामलों में किसानों के माल रिकार्ड में रेड एंट्री करने के आदेश दे दिए हैं। पराली जलाने की समस्या को खत्म करने की अपील करते हुए डीसी ने कहा कि पराली को जमीन में खपाने के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने किसानों से भी कहा कि सरकार द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध करवाई जा रही आधुनिक मशीनरी का इस्तेमाल कर किसान पराली को खेतों में ही खपाने की पहल करें। उन्होंने खेतीबाड़ी विभाग के अधिकारियों को कहा कि रोटावेटर, हैप्पीसीडर व सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम जैसी मशीनरी के इस्तेमाल की लगातार जांच की जाए।
पराली के खिलाफ सभी विभाग हुए एकजुट
जांच प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर देते हुए डीसी ने कहा कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पराली जलाने वालों के चालान करने शुरू कर दिए हैं। संबंधित अधिकारियों को मौके पर पड़ताल करने व इसकी रिपोर्ट तत्काल करने के निर्देश दिए। वहीं सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों से भी अपने खेतों में पराली न जलाने के लिए लिखित में लिया गया है। पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए गांव स्तर पर नोडल अफसर तैनात कर दिए गए हैं। सहकारिता, माल, ग्रामीण विकास व पंचायत, बागवानी और भू संरक्षण विभाग पावरकॉम के साथ मिलकर पराली जलाने से होने वाले खतरों से निपटने के लिए काम कर रहा है।
स्कूलों और कॉलेजों ने गोद लिए गांव
जानकारी के मुताबिक लोग पराली न जलाए इसके लिए जिला प्रशासन भी काफी सख्त है। वहीं, स्कूल और कॉलेज भी अब लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभा रहे है। स्कूलों की तरफ से जहां जागरूकता रैलियां निकाली जा रही है। वहीं, कॉलेजों की तरफ से पांच-पांच गांव गोद लिए गए हैं। साथ ही जागरूकता मुहिम चलाई जा रही है।
सरकारी मुलाजिम की एसीआर पर पड़ेगा असर
इससे पहले प्रशासन ने तय किया था कि जो भी सरकारी मुलाजिम है। वह अपने खेतों में जाकर पराली नहीं जलाएंगे। उनको इसके लिए प्रशासन को पहले स्व घोषणा पत्र देना होगा। वहीं, इसके बाद भी यदि कोई नियमों को ताक पर रखकर पराली जलाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके तहत उनकी एसीआर में इसे दर्ज किया जाएगा जिससे प्रमोशन आदि प्रभावित होगी।