देश में कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही हैं। इसके लिए रेलवे ने खास तैयारी की है। उत्तर रेलवे ने मरीजों को अलग-अलग रखने के लिए ट्रेन के कोचों में अलग से आइसोलेशन वार्ड तैयार किया है। भविष्य में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने पर रेलवे के इन कोचों का इस्तेमाल संदिग्धों या मरीजों को आइसोलेट करने में किया जा सकता है।
अब तक इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 873 हो गई है। वहीं, इस वायरस से अब तक 19 लोगों की जान जा चुकी है। सीनियर डीसीएम हरि मोहन ने बताया कि उत्तर रेलवे की उत्पादन इकाई जगाधरी वर्कशॉप में मौजूदा संसाधनों को चिकित्सा बुनियादी ढांचे के प्रावधान के अनुरूप बनाने पर विचार किया था और न्यूनतम संशोधन करके स्लीपर क्लास कोच को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में बदल दिया।
प्रत्येक कोच में 10 आइसोलेशन वार्ड होंगे, बेहतर स्पेस के लिए प्रत्येक वार्ड के मध्य बर्थ को हटा दिया गया है। डिब्बे के फर्श को प्लाई बोर्ड से समतल किया गया है। वार्ड को अलग रखने के लिए कंप्रेग बोर्ड की सहायता से विभाजित किया गया है। वहीं प्रत्येक वार्ड में बोतल होल्डर, चिकित्सा उपकरणों के लिए 220 वोल्टेज बिजली के स्विच और हवा के आवागमन के लिए विशेष पर्दे लगाए गए हैं। जबकि कोच को बाहर से विधुत सप्लाई देने के लिए भी 415 वोल्ट का स्विच का भी प्रावधान है।
शौचालय को बाथरूम में कनवर्ट किया
हर कोच के चार शौचालयों में से दो शौचालयों के टॉयलेट पेन को हटाकर उचित प्लाई फर्श लगाकर उसे बाथरूम में कनवर्ट किया गया है। बाथरूम में हैंड शावर, बाल्टी और मग उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं इसकी सफाई के लिए भी खास इंतजाम किया गया है। मंडल रेल प्रबधक गुरिंदर मोहन सिंह ने इसके सन्दर्भ में स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यक हुआ तो, वर्कशॉप की कोचों को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में संशोधित करने की क्षमता को सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार बढ़ाया भी जा सकता है।