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चंडीगढ़ में हंगामा: मोहाली से आए किसान ट्रैक्टरों से बैरिकेड तोड़ चंडीगढ़ में घुसे, एसएसपी घायल

Fri, 15 May 2026 01:55 PM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली/चंडीगढ़

सार

किसान नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पंजाब के पानी और अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। प्रदर्शन के चलते मोहाली और चंडीगढ़ की सीमाओं पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और कई मार्गों पर यातायात भी प्रभावित रहा।
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किसानों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अपनी मांगों के समर्थन में पंजाब के किसानों ने चंडीगढ़ कूच किया। ये किसान मोहाली की ओर से चंडीगढ़ आ रहे थे मगर बॉर्डर पर पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया।
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इसी दौरान किसान का गुस्सा फूट गया और वे ट्रैक्टरों से बैरिकेड तोड़कर चंडीगढ़ सीमा में घुस गए। इस हंगामे के दौरान चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर बैरिकेड पर लगे कंटीले तारों से उलझ कर घायल हो गईं जबकि दो जवानों को भी चोटें आईं। किसानों को चंडीगढ़ में घुसने से रोकने के लिए पुलिस ने 1400 जवान तैनात किए थे।

इस दौरान पुलिस ने उन पर पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोले भी दागे। चंडीगढ़ में भी किसानों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस से तीखी नोकझोंक भी हुई। इस दौरान दो महिलाओं समेत 40 किसानों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें सेक्टर-34 थाने ले जाया गया। उधर किसान चंडीगढ़ में बुड़ैल जेल चौराहे तक पहुंच चुके थे। पुलिस की वाटर कैनन और आंसू गैस की कार्रवाई के बाद काफी किसान तितर-बितर हो गए थे। इस दौरान पुलिस ने जब किसान नेताओं से बातचीत की तो पहले हिरासत में लिए अपने किसानों को रिहा करने की मांग रखी। चंडीगढ़ पुलिस ने शर्त मान ली दो घंटे बाद हिरासत में लिए किसानों को छोड़ दिया जिसके बाद किसान मोहाली सीमा में लौट गए।
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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले काफी संख्या में किसान शुक्रवार सुबह फेज-9 स्थित नेचर पार्क में जुटने शुरू हो गए थे जहां से उन्होंने पंजाब लोक भवन की ओर मार्च निकाला। किसानों के बढ़ते काफिले को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने बुड़ैल जेल के पास बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।

इस दौरान किसान नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पंजाब के पानी और अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। प्रदर्शन के चलते मोहाली और चंडीगढ़ की सीमाओं पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और कई मार्गों पर यातायात भी प्रभावित रहा। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब किसानों ने ट्रैक्टरों से बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस कार्रवाई के दौरान कुछ किसानों को मामूली चोटें भी आईं। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी, हमें नहीं रोक सकते : राजेवाल

किसान यूनियन राजेवाल के प्रधान बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है और हमें वहां जाने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा, किसान संगठन पंजाब के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे और केंद्र सरकार को पंजाब के मुद्दों को गंभीरता से लेना होगा। प्रदर्शन में किसान यूनियन लखोवाल, राजेवाल, डकौंदा, बूटा सिंह बुर्जगिल समेत कई किसान संगठनों के नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पंजाब के पानी और अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई।

पानी के मसले पर केंद्र का दखल बर्दाश्त नहीं

धरने के दौरान किसान संगठनों ने अपने मांग पत्र में कहा कि संविधान के अनुसार नदियां, झीलें और डैम राज्य का विषय हैं तथा केंद्र सरकार को राज्यों के अधिकारों में दखल देना बंद करना चाहिए। किसानों ने पंजाब पुनर्गठन एक्ट की धारा 78, 79 और 80 को रद्द करने की मांग उठाते हुए कहा कि नदी जल बंटवारे के मामले में पंजाब के साथ लंबे समय से अन्याय हो रहा है। किसानों ने पंजाब के पानी के मुद्दे को रिपेरियन और बेसिन सिद्धांत के आधार पर हल करने की मांग रखी। प्रदर्शनकारियों ने चंडीगढ़ और पंजाब यूनिवर्सिटी को पंजाब को सौंपने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। साथ ही एमएसपी गारंटी का मुद्दा भी उठाया।
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