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पंजाब रेरा का फैसला: कोविड तर्क खारिज, बिल्डर को देना होगा ब्याज

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मोहाली। पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने रियल एस्टेट कंपनी ओमेक्स न्यू चंडीगढ़ डेवलपर्स के खिलाफ फैसला सुनाते हुए खरीदारों को करीब 25 लाख ब्याज देने का आदेश दिया है। यह मामला चंडीगढ़ की नीलम अरोड़ा और अंक्षिका अरोड़ा द्वारा दायर शिकायत से संबंधित है, जिन्होंने द लेक प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक किया था।आदेश में रेरा ने स्पष्ट किया कि केवल बायर्स एग्रीमेंट की तारीख को आधार नहीं माना जा सकता, बल्कि वास्तविक लेन-देन और भुगतान की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाएगा। जांच में पाया गया कि फ्लैट की बुकिंग दिसंबर 2018 में हो चुकी थी और खरीदारों ने उसी समय तक 95 प्रतिशत से अधिक भुगतान कर दिया था, जबकि बायर्स एग्रीमेंट 26 दिसंबर 2022 को किया गया था। फ्लैट का कब्जा जुलाई 2023 तक देना था, लेकिन वास्तविक स्थिति के अनुसार इसे दिसंबर 2021 तक दिया जाना चाहिए था। हालांकि कब्जा अंततः 11 अगस्त 2024 को सौंपा गया, जिससे लगभग तीन साल की देरी हुई। अथॉरिटी ने कोविड-19 और मंजूरी संबंधी देरी के तर्कों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले फॉर्च्यून इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम ट्रेवर डी’लिमा सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय का हवाला दिया और कहा कि परियोजना पूर्णता के लिए तीन साल की अवधि उचित मानी जाती है। इसलिए बिल्डर को पूरी देरी अवधि के लिए ब्याज देना होगा। आदेश में यह भी कहा गया कि खरीदार कमजोर स्थिति में होते हैं और उन पर अनुचित शर्तें थोपी नहीं जा सकतीं। ब्याज की गणना एसबीआई के एमसीएलआर + 2% दर से की जाएगी।
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