मोहाली। कोरोना को रोकने के लिए एक तरफ तो सरकार कड़े कदम उठा रही है, दूसरी तरफ पशु मंडियां लगाकर राजस्व बटोरने की तैयारी में भी है। राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग ने जिलों में पशु मेलों की जगह के लिए ई-नीलामी के लिए शार्ट निलामी नोटिस जारी किया है।
12 मई को होने वाले इस ई-नीलामी में हिस्सा लेने के लिए सिक्योरिटी की रकम प्राप्त होने वाले राजस्व का 5 प्रतिशत रखी गई है। जो 3 करोड़ 53 लाख 10 हजार रुपये बनती है।
कोरोना से पूरा देश जूझ रहा है। मोहाली सहित पूरे राज्य में रात का कर्फ्यू जारी है। नियमों का उल्लंघन करने और मास्क पहनने वालों के चालान काटे जा रहे हैं। शादियों व अंतिम संस्कार सहित सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को सीमित संख्या में एकत्र होने के निर्देश हैं। वहीं, दूसरी तरफ सरकार अपने ही आदेशों को दरकिनार कर राज्य में 24 स्थानों पर पशु मेले लगाने के लिए ई-नीलामी करवा रही है।
24 जगहों पर लगते हैं पशु मेले
उल्लेखनीय है कि राज्य में 24 जगहों पर हर महीने पशु मेले लगते हैं। अमृतसर, खन्ना व सुभानपुर में रोज पशु मेला लगता है। हर महीने लगने वाले इन पशु मेलों में हजारों की संख्या में लोग पशुओं की खरीद फरोख्त के लिए पहुंचते हैं। पशु मेलों की हालत देखने से साफ हो जाता है कि इनमें कोरोना दिशानिर्देशों के सभी नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। न तो कोई मास्क पहनता है न ही सैनिटाइजेशन की व्यवस्था होती है। ऐसे में यह पशु मेले कोरोना संक्रमण के फैलाव का बड़ा केंद्र हो सकते हैं।
पिछले साल मिला 70.60 करोड़ राजस्व
पिछले वित्त वर्ष में पशु मेलों से राज्य सरकार को 70 करोड़ 62 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ था। संभव है इसी राजस्व के लिए पशु मेलों को अपने ही आदेशों की अवहेलना कर सरकार मंजूरी दे रही है। पंजाब के सेहत विभाग से सेवामुक्त डॉ. कुलदीप सिंह बताते हैं कि राज्य में पशु मंडियों से कोरोना संक्रमण के कई मामले सामने आए हैं। डॉ. कुलदीप सिंह के मुताबिक राज्य सरकार ने ऐसे स्थानों से संक्रमित होने वालों का कोई डाटाबेस तैयार नहीं किया है, जो सरकार की कारगुजारी पर सवाल खड़े करता है। डॉ. कुलदीप सिंह का कहना है कि मौजूदा हालात में पशु मंडियां लगाए जाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।