मोहाली। कोरोना काल में शहर को साफ सुथरा बनाने और स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग सुधारने के लिए नगर निगम ने अपना काम शुरू कर दिया है। निगम ने शहर की सफाई का ठेका पांच साल के लिए एक निजी कंपनी को सौंपने की योजना बनाई है। यह कंपनी मैन्युअल और मशीनों से शहर की सफाई करेगी। यहां तक कि मार्केट में और सड़कों पर फुटपॉथों आदि की धुलाई करना भी इसी कंपनी की जिम्मेदारी होगी। वहीं बाजारों वाले इलाकों में सफाई का काम रात में भी होगा। इस काम पर हर साल करोड़ों रुपये की लागत आएगी और इस प्रोजेक्ट में नगर निगम एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी। अगर शहर की साफ-सफाई के काम में दिक्कत आती है तो कंपनी पर कार्रवाई भी की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक अभी शहर में दिल्ली की एक निजी कंपनी द्वारा सफाई काम किया जाता है। कंपनी को पांच साल का ठेका दिया गया था। लेकिन पिछले साल कोविड और निगम चुनाव टलने के कारण हाउस की बैठक नहीं हो पाने की वजह से कंपनी का एक साल के लिए ठेका बढ़ा दिया गया था। अब जून में कंपनी का ठेका खत्म होने वाला है। ऐसे में नगर निगम ने पहले ही नई कंपनी को ठेका देने की तैयारी कर ली है। निगम अधिकारियों की मानें तो इस बार पूरी योजना के साथ कंपनी चुनी जाएगी। इस संबंधी कड़े नियम तय किए गए हैं। जो कंपनी नियमों पर खरी उतरेगी उसे ही ठेका दिया जाएगा। नगर निगम की तरफ से इस संबंधी मई में कंपनी चुनने से लेकर अन्य औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। पंद्रह जून से नई कंपनी अपना काम शुरू कर देगी।
वहीं शहर के डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने बताया कि मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू शहर में साफ-सफाई को लेकर काफी गंभीर हैं। उनकी कोशिश यही है कि पूरी तसल्ली से नई कंपनी चुनी जाए। इसके लिए पूरी प्रकिया चल रही है और उम्मीद है कि पंद्रह जून को नई कंपनी काम संभाल लेेगी।
पूूरा शहर चार जोन में बांटा, सफाई के बाद कंपनी फोटो खींचकर निगम को भेजेगी
शहर में सफाई का काम उचित तरीके से हो सके, इसके लिए नगर निगम पहले से ही गंभीर है। शहर में 50 वार्ड हैं। सभी वार्डों को चार जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन में एक सेनेटरी इंस्पेक्टर को इंचार्ज बनाया गया है। इसके अलावा सफाई की बीट बनी हुई है। प्रत्येक बीट के लिए मुलाजिम तय किए गए हैं। सफाई के बाद मुलाजिमों को सफाई किए गए इलाके की फोटो तक खींचकर निगम को भेजनी होगी। हालांकि पुरानी कंपनी को लेकर शर्तें इस तरह की थी, कि कंपनी पर कई आरोप लगे थे। मामला विजिलेंस तक भी पहुंचा था। लेकिन कंपनी अपना काम पूरा करके गई है।
ट्राइसिटी ही नहीं, पूरे पंजाब में भी मोहाली पिछड़ा सफाई के मामले में
भले ही नगर निगम की ओर से पांच साल में करोड़ों रुपये सफाई पर ही खर्च किए गए हैं। लेकिन अपना शहर सफाई के मामले में चंडीगढ़ या पंचकूला से ही नहीं बल्कि पंजाब के अन्य शहरों से भी पिछड़ गया। जानकारों की मानें तो शहर की रैंकिंग सुधरे, इसको लेकर सरकार ने ही गंभीरता नहीं दिखाई। 2020 की स्वच्छता रैंकिंग में मोहाली को 157वां रैंक मिला था। जबकि 2019 में मोहाली 154वें स्थान पर था। 2018 में मोहाली का स्थान 121 नंबर पर था। वहीं, चंडीगढ़ जहां टॉप-20 में रहा। वहीं, पंचकूला टॉप-100 में जगह बनाने में कामयाब रहा था।