मोहाली। वित्त एवं ठेका कमेटी की वित्तीय शक्ति को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। मंगलवार को नगर निगम में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने इस मामले में प्रेस कांफ्रेंस कर जबाबी हमला बोला। इस मौके मेयर अमरजीत सिंह सिद्धू, सीनियर डिप्टी मेयर अमरीक सिंह सोमल और डिप्टी कुलजीत सिंह बेदी हाजिर रहे।
इस मौके पर मेयर ने कहा कि वित्त एवं ठेका कमेटी के पास एक करोड़ के विकास कार्यों के प्रस्ताव करने की ताकत है। वह जल्दी ही वित्त एवं ठेका कमेटी की बैठक बुलाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विरोधी पार्षद लोग को गुमराह करने के लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में सच्चाई को सामने लाने का फर्ज उनका है, क्योंकि वह पूरे शहर के मेयर हैं।
प्रेस कांफ्रेस में मेयर ने कहा कि विरोधी पार्षद पूरी तरह से झूठ बोल रहे हैं कि वित्त एवं ठेका कमेटी को हाउस की तरफ से दी गई एक करोड़ रुपये की शक्ति छीन ली गई। उन्होंने कहा कि मोहाली नगर निगम की तरफ से पास किए गए प्रस्ताव को स्थानीय निकाय विभाग ने पास किया है। पत्रकारों के पूछे सवाल में उन्होंने कहा कि नगर निगम एक्ट के मुताबिक वित्त एंड ठेका कमेटी पहले की तरह कभी भी बैठक कर सकती है। साथ ही विकास के काम पास करवा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने आजाद ग्रुप के प्रमुख व पूर्व मेयर कुलवंत सिंह पर भी निशाना साधा।
मेयर ने कहा कि जितना काम पूर्व मेयर ने पांच सालों में करवाया है, उतना काम उन्होंने व उनकी टीम ने तीन महीनों में कर दिया है। इस चीज से विपक्ष बौखलाया हुआ है। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह नगर निगम चुनाव में लोगों ने अन्य दलों को नकारा था। इसी तरह आने वाली विधानसभा चुनाव में होगा।
सोमवार को आजाद ग्रुप ने जताया था विरोध
जिक्रयोग है कि सोमवार को आजाद ग्रुप के पार्षदों ने प्रेस कांफ्रेंस कर स्थानीय निकाय विभाग द्वारा जारी पत्र की कॉपी दिखाते हुए कहा कि सेेहत मंत्री बलबीर सिद्धू की मौजूदगी में नगर निगम की मीटिंग में हाउस की बहुसम्मति से वित्त एवं ठेका कमेटी को एक करोड़ रुपये तक खर्च करने की शक्ति दी गई थी। इसका उस समय भी आजाद ग्रुप के पार्षदों ने विरोध किया था, पर उसे निकाय विभाग ने खारिज कर दिया है। विभाग द्वारा मोहाली समेत सारे निगमों के कमिश्नरों को पत्र में कहा गया है कि सरकार के ध्यान में आया है कि नगर निगमों में वित्त एवं ठेका कमेटी के जरिए ऐसे प्रस्ताव पेश किए जाते हैं, जिनकी जनरल हाउस के जरिए सरकार से मंजूरी लेनी जरूरी होती है, लेकिन कमेटी एक प्रस्ताव के जरिए जनरल हाउस से कमेटी के सभी कामों की पुष्टि करवा लेती है और ऐसा करके पंजाब नगर निगम 1976 एक्ट की धाराओं पर सरकार की हिदायतों की अनदेखी की जाती है। पत्र में यह भी साफ कहा गया है कि जनरल हाउस में प्रस्ताव पर चर्चा के बाद ही कोई काम कमेटी के सामने लाया जाए।
पशुओं से निपटने की बनी रणनीति
मेयर ने कहा कि शहर से पशुओं को बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिन लोगों के पास अपने अपनी जगह है, वे पशुओं को वहां पर ले जा सकते हैं। नहीं तो वे इस बारे में नगर निगम को बता सकते हैं। नगर निगम की तरफ से उन्हें शहर में ही पशुओं के लिए जगह मुहैया करवाई जाएगी।