भारतीय सेना के कर्नल और उनकी पत्नी ने मोहाली के डेराबस्सी में एक फ्लैट खरीदा था। फ्लैट की कीमत लगभग 65 लाख रुपये थी। दंपती ने कंपनी को 63,51,986 रुपये का भुगतान किया था। दंपती ने यह फ्लैट एटीएस एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 9 साल पहले खरीदा था। शर्तों के मुताबिक एटीएस कंपनी को खरीदार दंपती को दो साल में फ्लैट का पजेशन (कब्जा) देना था। करीब 9 साल बीत जाने के बावजूद एटीएस ने दंपती खरीदार को न तो फ्लैट का कब्जा दिया और न ही उनके 63,51,986 रुपये वापस किए।
परेशान होकर ऑफिसर्स एन्क्लेव, डिफेंस रोड, वेस्ट पटेल नगर, नई दिल्ली निवासी सेना के कर्नल ओंकार पाल सिंह और उनकी पत्नी मंधीर कौर ने एटीएस एस्टेट प्राइवेट लिमिटेट के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग मोहाली में केस दायर कर दिया। शिकायतकर्ता दंपती का यह केस एडवोकेट रविइंद्र सिंह ने लड़ा। अब इस मामले में फैसला आया है, जिससे शिकायतकर्ता दंपती को फायदा हुआ है।
आयोग ने कंपनी पर लगाया 1.5 लाख का जुर्माना
आयोग ने अपना फैसला सुनाते हुए एटीएस एस्टेट प्राइवेट लिमिटेट दोषी करार देते हुए शिकायतकर्ता के हक में फैसला सुनाया है। आयोग ने एटीएस कंपनी पर 1.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी को यह राशि शिकायतकर्ता दंपती को देनी होगी। इसके अलावा फ्लैट का पजेशन जल्द शिकायतकर्ताओं को देने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता दंपती की तरफ से फ्लैट के लिए दी गई कुल राशि 63,51,986 रुपये का 9 प्रतिशत ब्याज देना का आदेश दिया है। राशि का ब्याज फरवरी 2018 से लेकर अभी तक का देना होगा।
आज तक नहीं मिला फ्लैट का कब्जा
शिकायतकर्ता दंपती का केस लड़ने वाले वकील रविइंद्र सिंह ने आयोग को बताया कि शिकायतकर्ता कर्नल ओंकार पाल सिंह और उनकी पत्नी मंधीर कौर ने अगस्त 2015 में एटीएस एस्टेट प्राइवेट लिमिटेट के मोहाली के डेराबस्सी में एटीएस गोल्ड मीडोज लाइफस्टाइल के टावर-5 की 11वीं मंजिल पर टाइप-ए फ्लैट बुक कराया था। इसके लिए दंपती ने फ्लैट के लिए फ्लैट की राशि 65,45,000 रुपये पर तय हुई थी। शिकायतकर्ताओं ने कंपनी को अलग-अलग तारीखों में 63,51,986 रुपये का भुगतान किया था। नियमों व शर्तों के मुताबिक कंपनी को शिकायतकर्ताओं को दो साल के भीतर फरवरी 2018 तक फ्लैट का कब्जा देना था। बावजूद इसके एटीएस कंपनी की तरफ से आज तक उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने की थी ये मांग
शिकायतकर्ताओं ने आयोग से अपील की कि एटीएस कंपनी को आदेश दिए जाएंगे कि उन्हें उक्त खरीदे गए फ्लैट का कब्जा दिया जाए। इसके अलावा समझौते के अनुसार दी गई राशि पर आज तक 12% प्रति वर्ष की दर से ब्याज दिया जाए। इस मामले में उन्हें हुई परेशानी के लिए पांच लाख रुपये का मुआवजा और केस खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये की मांग की।