मोहाली। सिविल अस्पताल में लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुविधाओं के नाम पर सिविल अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का आलम यह है कि लोगों को यूरिन सैंपल तक देने में परेशानी आ रही है। सेहत मंत्री के जिले के सिविल अस्पताल में शौचालयों की दुर्दशा की शिकायत अब सीएम दरबार तक पहुंच चुकी है।
मोहाली के सिविल अस्पताल में रोजाना हजारों लोग पहुंचते हैं। ओपीडी के साथ ही अस्पताल में भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों की खासी भीड़ रहती है। सरकारी कामकाज के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट लेने के लिए आने वालों की भी अच्छी खासी तादात होती है। आर्म्स लाइसेंस बनवाने या उसके रिन्यूवल के लिए होने वाला डोप टेस्ट भी सिविल अस्पताल में ही होता है। डोप टेस्ट के लिए आने वाले लोग सिविल अस्पताल के कमरा नंबर 9 में पहुंचते हैं। जहां से उन्हें यूरिन सैंपल देने के लिए एक डिब्बी देकर शौचालय में भेज दिया जाता है। इस कमरा नंबर 9 के पास जो शौचालय हैं उनकी हालत इतनी बदतर है कि वहां खड़े रहना भी इंसान के लिए मुश्किल है। कमोबेश सिविल अस्पताल के सभी सार्वजनिक शौचालयों की हालत ऐसी ही है। लोगों ने जब इन बदतर शौचालयों से संक्रमण के खतरे को लेकर डाक्टर्स से शिकायत की तो उनका तर्क था कि रेनोवेशन के चलते यह परेशानी आ रही है।
फेज 7 के रहने वाले जगदीप महाजन भी आर्म्स लाइसेंस के डोप टेस्ट के लिए सिविल अस्पताल गए थे। वहां की दुर्दशा को उन्होंने सिविल अस्पताल प्रबंधन के सामने रखा तो उन्हें कह दिया गया कि मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए रेनोवेशन चल रहा है, इसलिए परेशानी है। सहगल कहते हैं कि रेनोवेशन का शौचालय की साफ सफाई से क्या लेना-देना है। उन्होंने पार्किंग में भी गंदगी का आरोप लगाया। सिविल अस्पताल प्रबंधन के लापरवाह रवैए से नाराज जगदीप महाजन ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सेहत मंत्री के जिले के सिविल अस्पताल की शिकायत भेजी है। वहीं इस मामले पर सिविल अस्पताल प्रबंधन चुप्पी साधे बैठा है, कोई भी अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।