जीरकपुर। छतबीड़ चिड़ियाघर में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। चिड़ियाघर में पहाड़ी भालू के बाड़े में एक प्लास्टिक की बोतल देखी गई है। चिड़ियाघर में प्लास्टिक अंदर जा ही नहीं सकती तो वहां तक बोतल कैसे पहुंची। यह जांच का विषय है। चिड़ियाघर को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए गेट पर ही प्लास्टिक का सामान रोक दिया जाता है। चिड़ियाघर प्रबंधन ने जगह-जगह बोर्ड भी लगाए हैं, जिन पर प्लास्टिक की कोई भी चीज इधर-उधर न फेंकने संबंधी अपील की गई है। इतना करने के बावजूद भी एक जानवर के बाड़े में प्लास्टिक की बोतल मिलना एक बहुत बड़ी बात है। लोगों का कहना है कि अगर इस बोतल को भालू चबाकर निगल जाता तो उसके स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता था।
सुबह के समय सभी बाड़ों की सफाई की जाती है। उसके बाद ही जानवरों को बाड़ों में छोड़ा जाता है। गर्मियों की छुट्टियों के चलते आजकल 1500 से लेकर 2000 के करीब पर्यटक चिड़ियाघर में आते हैं। बाड़ों की देखरेख के लिए मात्र 20 मुलाजिम काम कर रहे हैं। हो सकता है कि किसी पर्यटक ने कोई बोतल बाड़े में फेंक दी हो। कल सुबह पहाड़ी भालू को बाड़े में छोड़ने से पहले सफाई के दौरान बोतल उठा दिया जाएगा।
- हरपाल सिंह, वन्य जीव अधिकारी, छतबीड़ चिड़ियाघर