डेराबस्सी। गुलाबगढ़ रोड पर जीबीपी रोज वैली कॉलोनी के निवासियों को पास से निकल रहे गंदे नाले की बदबू से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कॉलोनी के लोग पिछले कई दिनों से नाले की सफाई की मांग कर रहे हैं लेकिन उस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
जानकारी देते हुए कॉलोनी निवासी ओडी शर्मा, शिव कुमार, रणधीर सिंह, सुभाष चंद, अमरदीप, रूप लाल, केशव शर्मा, सुशीला देवी आदि ने बताया कि उनकी कॉलोनी में करीब 460 प्लॉट हैं। इनमें से 180 घरों में परिवार रहते हैं। वहीं 50 प्लॉटों पर निर्माण कार्य जोरों से चल रहा है। लोगों ने विरोध करते कहा कि कॉलोनी के पास से गुजरते गंदे नाले में से आती बदबू ने सांस लेना दूभर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलोनाइजर ने गंदे नाले को रिवर व्यू (नदी का किनारा)बता कर प्लॉट सेल किए थे। बाद में पता चला कि यह एक गंदा नाला है जिसमें डेराबस्सी के उद्योगों का सारा प्रदूषित पानी बहता है। गंदे पानी के कारण यहां लगातार मक्खियां और मच्छर आते रहते हैं जिससे बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। कॉलोनीवासियों का कहना है कि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे संघर्ष करने को मजबूर होंगे।
कोट्स
मामला मेरे ध्यान में नहीं था। जल्द ही गंदे नाले की सफाई कराई जाएगी। कॉलोनी काटने वाले जीबीपी ग्रुप का मालिक पहले ही लोगों के साथ करोड़ों रुपये की धोखोधड़ी करके फरार है। उसने लोगों को गंदे नाले के पास कॉलोनी काटकर लोगों से धोखाधड़ी की है। -रंजीत सिंह रेड्डी, प्रधान नगर काउंसिल, डेराबस्सी
----------------------------------------------
बॉक्स..............
शहर के ज्यादातर एसटीपी बंद, एडीसी ने दिए चालू करने आदेश
आदेशों का पालन नहीं किया तो होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
जीरकपुर। शहर में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट बन चुके हैं। ज्यादातर प्रोजेक्ट्स में एसटीपी बंद पड़े हैं और आधे से ज्यादा प्लांट तो ऐसे हैं जिन में एसटीपी प्लांट बना ही नहीं है। वहीं नियमों की बात करें तो हर बड़ी सोसायटी में एसटीपी होना अनिवार्य है। बीते शुक्रवार को एडीसी पूजा स्याल गरेवाल ने बिल्डरों से मुलाकात करके उनकी समस्याएं सुनीं। इसमें एसटीपी चालू करने के मुद्दे पर जोर देते हुए एडीसी ने कहा कि जल्द सभी प्लांट शुरू कर दिए जाए नहीं तो कार्रवाई होगी। अब देखना यह होगा कि क्या बिल्डर आदेश को मानेते हैं या फिर पहले की तरह अनदेखा करते हैं क्योंकि लगभग सभी बिल्डरों ने एसटीपी लोकदिखावे के लिए रखे हुए हैं। कुछेक सोसायटियो को छोड़कर सभी में ये बंद पड़े हैं।
क्यों नहीं चलाए जाते एसटीपी
यदि नियमों की बात की जाए तो हरेक बड़ी सोसायटी वह भले प्लॉटिंग प्रोजेक्ट हो या फिर हाईराइज, सबके लिए एसटीपी जरूरी है। नियमों के मुताबिक सोसायटी के हर घर का सीवरेज पहले ट्रीट किया जाएगा और उसके बाद नगर काउंसिल की सीवरेज लाइन में डाला जाएगा ताकि काउंसिल कि सीवर लाइन ब्लॉक न हो सके। इसके बाद यह पानी शहर के बड़े सीवरेज ट्रीटमंट प्लांट में जाएगा। जहां से पानी को ट्रीट करके आगे छोड़ा जाता है। सोसायटी द्वारा सीवरेज को ट्रीट करने की बात करें तो इस पर काफी खर्चा होता है। इस कारण बिल्डर कॉलोनाइजर या फिर आरडब्ल्यूए इसे अनदेखा कर देते हैं। हैरानी कि बात तो यह है कि बिल्डरों द्वारा सीवरेज का पानी बिना ट्रीट किए काउंसिल की सीवर लाइन और नदी-नालों में छोड़ दिया जाता है जो नियमों के बिल्कुल उलट है। बड़ी बात तो यह है कि नगर काउंसिल के अधिकारी इसे देखते भी नहीं।