नवरात्र आज से, शहर के मंंदिर विशेष रूप से तैयार
सुबह 6:33 से 7:32 तक है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। आज से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। इसे लेकर शहर के सभी फेजों और सेक्टरों के मंदिरों में तैयारियां हो गई हैं। मुख्य रूप से फेज-3बी2 स्थित श्री लक्ष्मी नारायाण मंदिर (श्री हनुमान मंदिर) में विशेष व्यवस्था की गई है। पंडित हितेंदर शर्मा ने बताया कि नवरात्रि पर कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 6:33 मिनट से 7:32 मिनट तक है।
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां भगवती के एक स्वरूप श्री शैलपुत्री, श्री ब्रह्मचारिणी, श्री चंद्रघंटा, श्री कूष्मांडा, श्री स्कंदमाता, श्री कात्यायनी, श्री कालरात्रि, श्री महागौरी, श्री सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह क्रम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सुबह शुरू होता है। देवी पुराण के अनुसार मां भगवती की पूजा-अर्चना करते समय सर्वप्रथम कलश/घट की स्थापना की जाती है।
कलश स्थापना के लिए सामग्री
जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र
जौ बोने के लिए शुद्ध साफ़ की हुई मिट्टी पात्र में बोने के लिए जौ
कलश स्थापना के लिए मिट्टी का कलश
कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल, मौली, इत्र, साबुत सुपारी
दूर्वा और कलश में रखने के लिए कुछ सिक्के
पंचरत्न, अशोक या आम के पांच पत्ते।
कलश ढकने के लिए ढक्कन।
ढक्कन में रखने के लिए बिना टूटे चावल।
पानी वाला नारियल।
नारियल पर लपेटने के लिए लाल कपड़ा और फूल माला
विधि
सबसे पहले जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र लें। इस पात्र में मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब एक परत जौ की बिछाएं। इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब फिर एक परत जौ की बिछाएं। इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब कलश के कंठ पर मौली बांध दें। कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक लिखें। अब कलश में शुद्ध जल, गंगाजल कंठ तक भर दें। कलश में साबुत सुपारी, दूर्वा, फूल डालें। कलश में थोड़ा सा इत्र डाल दें। कलश में पंचरत्न डालें। कलश में कुछ सिक्के रख दें। कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते रख दें। अब कलश का मुख ढक्कन से बंद कर दें। ढक्कन में चावल भर दें।