राजनीतिक उथल-पुथल में नगर परिषद के सुपरिंटेंडेंट पर केस दर्ज
डायरेक्टर द्वारा प्रस्ताव रद्द करने के बाद खरड़ परिषद के प्रधान ने सोमवार को बुलाई थी विशेष बैठक
ईओ का आरोप- मुझे बताए बिना सुपरिंटेंडेंट ने दफ्तर के स्टाफ की लगाई ड्यूटी
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली/खरड़। राजनीतिक उथल-पुथल के बीच नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी मनवीर सिंह गिल ने अपने ही दफ्तर के सुपरिंटेंडेंट गुरिंदर सिंह के खिलाफ केस दर्ज करवाया है। सुपरिंटेंडेंट गुरिंदर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने कार्यकारी अधिकारी की गैरमौजूदगी में परिषद प्रधान की ओर से बुलाई गई विशेष बैठक के लिए दफ्तर के स्टाफ की ड्यूटी लगा दी।
जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को कार्यकारी अधिकारी मनवीर सिंह ने थाना खरड़ पुलिस में शिकायत दी थी कि छह फरवरी सोमवार को नगर परिषद की प्रधान जसप्रीत कौर लौंगिया ने जो बैठक बुलाई है, इसके लिए सुपरिंटेंडेंट ने गलत तरीके से स्टाफ की ड्यूटी लगा दी है। जबकि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। कार्यकारी अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने सुपरिंटेंडेंट गुरिंदर सिंह के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है, जबकि गुरिंदर सिंह का कहना है कि उन्हें इस मामले में कुछ नहीं पता है और वह कुछ बोलना भी नहीं चाहते हैं।
सूत्रों के मुताबिक यह राजनीतिक लड़ाई पिछले काफी समय से चली आ रही है। नगर परिषद खरड़ में इस समय प्रधान अकाली दल की है। इनको हटाने के लिए 18 पार्षदों की ओर से अविश्वास प्रस्ताव दिया गया था। इस प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए नगर परिषद की प्रधान जसप्रीत कौर लौंगिया ने 20 जनवरी को एक बैठक बुलाई थी, लेकिन बैठक से पहले ही यहां पर हंगामा हो गया था। प्रधान के समर्थन में पहुंचे पार्षद मानसिंह और उनके भतीजे अमनदीप सिंह पर एक महिला होमगार्ड मुलाजिम पर हाथापाई करने के आरोप लगे थे।
बैठक से पहले कैमरे बंद करने के थे आरोप
20 जनवरी को हुई नगर परिषद की बैठक के बाद प्रधान जसप्रीत कौर लौंगिया ने कैमरे बंद करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि प्रदेश की आम आदमी पार्टी की सरकार जबरदस्ती उन्हें प्रधान के पद से हटाना चाहती है। इसके लिए वह प्रशासन और पुलिस विभाग का सहारा ले रही है। लेकिन पार्षदों का विश्वास उनके साथ है। नगर परिषद के कैमरे बंद करके वह मीटिंग में गड़बड़ी करना चाहते थे।
पूरा नहीं हुआ था कोरम
पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट के नियमानुसार विशेष बैठक में कम से कम 50 प्रतिशत पार्षदों का मौजूद होना जरूरी है। इस बैठक में सिर्फ दो ही पार्षद मौजूद थे। इसके बाद भी प्रधान ने अपना बहुमत साबित करने का प्रस्ताव पास करके स्थानक सरकार विभाग के डायरेक्टर को भेज दिया था। इसे डायरेक्टर की ओर से रद्द कर दिया गया है। इसके बाद प्रधान ने फिर से सोमवार को बैठक बुलाने का फैसला लिया था।
जानकार बोले- सुपरिंटेंडेंट पर मुकदमा करना गलत
पंजाब म्यूंसिपल एक्ट के जानकारों की माने तो परिषद के सुपरिंटेंडेंट पर मुकदमा करना गलत है। पंजाब म्यूंसिपल एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि कार्यकारी अधिकारी के अलावा सुपरिंटेंडेंट प्रधान की बुलाई हुई बैठक की चिट्ठी जारी नहीं कर सकता है।
अकाली दल के पास था बहुमत, आप जुटाने में हुई नाकामयाब
नगर परिषद खरड़ में कुल 27 वार्ड हैं। इनमें से अभी 26 पार्षद मौजूद हैं। चुनाव के समय अकाली दल के 14 पार्षद जीते थे। वहीं कांग्रेस के नौ पार्षद, तीन निर्दलीय और एक आम आदमी पार्टी का पार्षद जीता था। 10 जनवरी को 18 पार्षदों ने मिलकर प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन सूत्रों के मुताबिक अकाली दल की प्रधान 18 में से एक पार्षद को अपने पक्ष में लेने में कामयाब रही थी। इस कारण नगर परिषद के सदन में यह प्रस्ताव पास नहीं हो सकता था। इसी कारण अब तक यह हंगामा चला आ रहा है।