मोहाली। नगर निगम चुनाव को लेकर राज्य सरकार की अधिसूचना के बाद सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। सभी दल नए सियासी समीकरणों के हिसाब से जोड़तोड़ की राजनीति में जुट गए हैं। इसी कड़ी में अकाली दल ने तीस वार्डों में अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी हैं, जबकि बीस सीटों पर अभी पेच फंसा हुआ है।
वरिष्ठ अकाली नेता व पूर्व मेयर कुलवंत सिंह की अध्यक्षता में पूर्व अकाली पार्षदों की एक अहम बैठक हुई। जिसमें कई घंटे की मशक्कत के बाद करीब तीस सीटों पर उम्मीदवारों के नामों पर फैसला कर लिया गया। जबकि जिन सीटों पर अकाली दल भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ती आई है, वहां पर पेच फंस रहा है। हालांकि अकाली दल के नेताओं को कहना है कि एक-दो दिन में सारी सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर एक साथ ही सभी वार्डों में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की जाएगी। प्रेस से बातचीत करते हुए मेयर कुलवंत सिंह ने बताया कि उनकी तरफ से पूर्व पार्षदों से बैठक के बाद सर्वसम्मति से उम्मीदवारों के नाम तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अकाली दल की तरफ से 26 पूर्व पार्षदों की सीटों के बारे में सहमति कायम करके कुल तीस सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए गए हैं। जबकि शेष सीटों पर उम्मीदवारों का फैसला जल्दी कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जितने दावे कर ले, लेकिन लोगों का समर्थन उनके साथ है। हम बहुमत हासिल करके मेयर बनाएंगे। शेष सीटों पर उनका कहना था कि इन वार्डों में चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों की संख्या अधिक है, इसलिए यहां किसे टिकट देना है उस पर मंथन किया जा रहा है। बताते चलें कि 13 फरवरी तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने संबंधी अधिसूचना जारी करने के बाद से यह तय है कि चुनाव फरवरी से पहले होंगे। इस संबंधी निर्वाचन आयोग की तरफ से चुनाव संबंधी घोषणा की जा सकती है।
भाजपा और बिगाड़ सकती है खेल
भले ही पूरे पंजाब में भाजपा और अकाली दल अलग चुनाव लड़ने की तैयारी में है। मगर सूत्रों ने बताया कि शहर में भाजपा और अकाली दल में समझौता भी हो सकता है। अभी कोई भी दल इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है। हालांकि भाजपा इस बार सभी पार्टियों के लिए मुसीबत बन सकती है, क्योंकि भाजपा ने कई ऐसे लोगों को अपने से जोड़ा है। जिनकी इलाके में काफी अच्छी पैठ है। जानकारों की मानें तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हो सकता है, क्योंकि जिन वार्डों में कांग्रेस को भितरघात का खतरा है। उन्हीं वार्डों में उक्त उम्मीदवार भाजपा उतारेगी। ऐसे में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को इस बार मशक्कत करनी पड़ सकती है। इसके अलावा यदि आप अपने चुनाव चिन्ह पर निगम चुनाव लड़ती है तो सभी दलों के लिए राह मुश्किल हो जाएगी।